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लक्जरी जीवन — अनुभव, संतुलन और सजगता

💎 लक्जरी जीवन — अनुभव, संतुलन और सजगता  जब हम “लक्जरी” शब्द सुनते हैं, तो अक्सर दिमाग में चमक‑दमक, महँगी चीज़ें, बड़े घर या ब्रांडेड वस्तुएँ आती हैं। लेकिन मेरी यात्रा और अनुभवों ने मुझे यह सिखाया कि असल लक्जरी इन सबके परे है। सच्ची विलासिता वह है जो हमें मन की शांति, समय की स्वतंत्रता और जीवन के गहरे अनुभव देती है। यह वह अवस्था है जब हम जीवन को बिना जल्दबाज़ी, बिना दबाव, और पूरी सजगता के साथ जीते हैं। अनुभव में छिपी विलासिता सिक्किम की घाटियों में बर्फ़‑भरी चोटियों का दृश्य, ज़ीरो पॉइंट की ठंडी हवा में साँस लेना, फूलों से भरी घाटियों में खो जाना — यह सब मुझे याद दिलाता है कि लक्जरी का असली आनंद अनुभव में है। राजाबरारी के जंगलों में बिताए गए कुछ दिन और परिवार के साथ साझा किए पल यह सिखाते हैं कि जीवन का सबसे बड़ा निवेश समय और संबंधों में होता है। महँगी वस्तुएँ हमें तात्कालिक खुशी दे सकती हैं, लेकिन अनुभव और संबंध स्थायी संतोष और गहराई देते हैं।  लक्जरी का चार सूत्र संतोष: कम में भी खुशी पाना और अधिक की लालसा को शांत करना। स्वतंत्रता: अपने समय और क्षणों पर नियंत्रण रखना। अर्थपू...

Silent Seva, Infinite Blessings

Silent Seva, Infinite Blessings  मैंने जीवन भर निःस्वार्थ भाव से सेवा की — परिवार के लिए, समाज के लिए। मेरा हर कर्म शुद्ध और स्वार्थ-मुक्त था। फिर भी, इसे अक्सर नज़रअंदाज़ किया गया, तुच्छ समझा गया, और कभी-कभी अपमान भी सहना पड़ा। फिर भी, मैं नहीं रुका। मेरा भरोसा लोगों पर नहीं, बल्कि उस पर था जो हर भावना को जानता है — ईश्वर पर। उसकी कृपा से सेवा के द्वार धीरे-धीरे खुलते गए। अपमान और तिरस्कार ही मेरी असली परीक्षा बने। आज मेरे भीतर अनुभव, आत्मविश्वास और करुणा का एक असीम भंडार है — ऐसा खजाना जिसे कोई छीन नहीं सकता। अब मेरी ऊर्जा उन्हीं स्थानों पर जाती है, जहां सेवा को प्रेम और श्रद्धा से स्वीकार किया जाता है। निःस्वार्थ सेवा का सार: ईश्वर की दृष्टि में यह सर्वोच्च है। समाज इसे कभी-कभी तुच्छ समझे, लेकिन यह हमारी परीक्षा बनती है। अपमान और तिरस्कार से छिपा है हमारा असली आत्मबल। जब सेवा स्वार्थ-मुक्त होती है, हर कठिनाई सीख बन जाती है। सच्ची सेवा हमें असीम आंतरिक शांति और खुशी देती है। "जिस दिन तुम्हारे भीतर परमार्थ की अग्नि स्वार्थ को जला देगी, उसी दिन ईश्वर की करुणा तुम्हारी ओर श...

पहलगाम की पुकार: एकता पर हमला, इंसानियत का इम्तिहान

पहलगाम की पुकार: एकता पर हमला, इंसानियत का इम्तिहान  (22 अप्रैल 2025 की आतंकी घटना पर आधारित) 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बाइसारन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना न केवल एक आतंकी हमला है, बल्कि यह हमारे देश की एकता, अखंडता और सहिष्णुता पर सीधा प्रहार है। ऐसे समय में हमें एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। यह हमला हमें याद दिलाता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई ढील नहीं दी जा सकती। हमें अपने सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्दोष नागरिकों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि हो। इस दुखद घटना में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं। हम उनके दुख में सहभागी हैं और प्रार्थना करते हैं कि घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हों। इस हमले के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, यही हमारी न्याय प्रणाली से अपेक्षा है। आज समय आ गया है जब देश के हर नागरिक को इस बात का संकल्प लेना होगा कि नफरत, हिंसा और आतंक के विरुद्ध हम एकजुट हैं। धर्म, भाषा, क्षेत्र – इन सबसे ऊपर उठकर हमें...