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THOUGHTS COLLECTION 2025

THOUGHTS:-   Thoughts — आनंद किशोर मेहता ना मुझे काना-फूसी भाती है, ना जी-हुजूरी रास आती है; मैं तो बस प्रेम का राही हूँ। झूठ के सहारे बड़ी-बड़ी बातें की जा सकती हैं, लेकिन मानवता की ऊँचाई केवल सच से ही हासिल होती है। मानवता कोई वेश नहीं, जिसे ज़रूरत के हिसाब से बदला जा सके — यह तो आत्मा की असली परछाई है। जहाँ स्वार्थ बोलते हैं, वहाँ वास्तविकता खामोश हो जाती है — क्योंकि वह दिखावे की मोहताज नहीं होती। जो अपने ही मन की भ्रमों और दुर्बलताओं पर विजय पा ले — वही सच्चा शूरवीर है। माँ-बाप वो साया हैं जो धूप में जलते हुए भी हमें ठंडक देते हैं — और हम छाँव में रहकर भी उनकी तपन को नज़रअंदाज़ कर जाते हैं। दुनिया चाहे झूठ बोले या भ्रम फैलाए — पर अंततः तुम्हारा कर्म ही तुम्हारी पहचान बनता है। कृतज्ञता वह चाबी है जो हमारे पास मौजूद चीज़ों को ही पर्याप्त बना देती है। जीवन एक यात्रा है — कुछ साथ चलते हैं, कुछ मोड़ पर विदा लेते हैं, पर जिनसे प्रेम था, वे कभी दूर नहीं जाते। असली संघर्ष सड़क पर नहीं, अंदर की चुप्पी में छिपा होता है। कुछ स्थितियाँ स्वीकारना ही शां...

विज्ञान + आध्यात्म = संतुलित और सुरक्षित भविष्य

विज्ञान + आध्यात्म = संतुलित और सुरक्षित भविष्य  ~ आनंद किशोर मेहता परिचय आज की दुनिया विज्ञान की अद्भुत उन्नतियों से भरी हुई है। तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसी के साथ मानसिक तनाव, अस्थिरता और आध्यात्मिक रिक्तता भी बढ़ी है। सवाल यह है— क्या विज्ञान और आध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं? या क्या इनका समन्वय ही मानवता को संतुलित और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जा सकता है? यदि हमें एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और सुरक्षित समाज का निर्माण करना है, तो विज्ञान और आध्यात्म का मिलन अनिवार्य है। विज्ञान और आध्यात्म: विरोध नहीं, पूरक विज्ञान और आध्यात्म को अक्सर अलग दिशाओं में चलता समझा जाता है, जबकि यह सत्य के दो पहलू हैं। विज्ञान बाहरी जगत के रहस्यों को समझता है। आध्यात्म आंतरिक चेतना के रहस्यों को उजागर करता है। जब दोनों साथ चलते हैं, तब मानव जीवन संतुलित, नैतिक और प्रगतिशील बनता है। “तकनीक और संवेदनशीलता साथ चलें, तभी दुनिया सुरक्षित होगी।” विज्ञान की भूमिका विज्ञान ने चिकित्सा, संचार, अंतरिक्ष अन्वेषण और आधुनिक जीवन को नई दिशा दी है। विज्ञान तर्क और प्रमाण पर आधारित है...