Skip to main content

Posts

Showing posts with the label परमार्थ

Silent Seva, Infinite Blessings

Silent Seva, Infinite Blessings  मैंने जीवन भर निःस्वार्थ भाव से सेवा की — परिवार के लिए, समाज के लिए। मेरा हर कर्म शुद्ध और स्वार्थ-मुक्त था। फिर भी, इसे अक्सर नज़रअंदाज़ किया गया, तुच्छ समझा गया, और कभी-कभी अपमान भी सहना पड़ा। फिर भी, मैं नहीं रुका। मेरा भरोसा लोगों पर नहीं, बल्कि उस पर था जो हर भावना को जानता है — ईश्वर पर। उसकी कृपा से सेवा के द्वार धीरे-धीरे खुलते गए। अपमान और तिरस्कार ही मेरी असली परीक्षा बने। आज मेरे भीतर अनुभव, आत्मविश्वास और करुणा का एक असीम भंडार है — ऐसा खजाना जिसे कोई छीन नहीं सकता। अब मेरी ऊर्जा उन्हीं स्थानों पर जाती है, जहां सेवा को प्रेम और श्रद्धा से स्वीकार किया जाता है। निःस्वार्थ सेवा का सार: ईश्वर की दृष्टि में यह सर्वोच्च है। समाज इसे कभी-कभी तुच्छ समझे, लेकिन यह हमारी परीक्षा बनती है। अपमान और तिरस्कार से छिपा है हमारा असली आत्मबल। जब सेवा स्वार्थ-मुक्त होती है, हर कठिनाई सीख बन जाती है। सच्ची सेवा हमें असीम आंतरिक शांति और खुशी देती है। "जिस दिन तुम्हारे भीतर परमार्थ की अग्नि स्वार्थ को जला देगी, उसी दिन ईश्वर की करुणा तुम्हारी ओर श...

जब स्वार्थ टूटेगा, तब परमार्थ गूँजेगा

जब स्वार्थ टूटेगा, तब परमार्थ गूँजेगा आज का मानव जीवन अक्सर स्वार्थ और व्यक्तिगत इच्छाओं के घेरे में फँसा दिखाई देता है। जिसे छोड़ना कठिन लगे, वही सबसे बड़ा बंधन बन जाता है। यही बंधन आज हमारे समाज का सबसे प्रमुख जाल है — स्वार्थ। हम इसे कभी-कभी स्वतंत्रता समझ लेते हैं, जबकि यह केवल हमारी दृष्टि और कर्मों को सीमित करने वाली जंजीरें हैं। स्वार्थ का त्याग किसी वास्तविक मृत्यु का संकेत नहीं देता; यह तो पुराने अहंकार, भ्रम और सीमाओं का अंत है। पर यह सत्य समझने में समय लगता है। हर हृदय में परमार्थ का बीज मौजूद है, लेकिन स्वार्थ की परतें उसे ढक देती हैं। इसलिए हम भीतर से महसूस करने के बावजूद उसे अपनाने में असमर्थ रहते हैं। फिर भी, समय और अनुभव की शक्ति अद्भुत है। जब स्वार्थ अपने ही भार से टूटेगा, तब परमार्थ स्वतः आकर्षण बन जाएगा। यह आकर्षण घोषणाओं से नहीं, बल्कि शांत और निस्वार्थ कर्मों से फैलता है। यही शक्ति है, जो धीरे-धीरे समाज और व्यक्तियों को बदल देती है। जब ‘ मैं ’ से मन भर जाएगा, तब ‘ हम ’ की ओर यात्रा स्वाभाविक रूप से शुरू होगी। यह यात्रा कठिन या बोझिल नहीं होगी, बल्कि जीवन क...