जीवन में परम पिता कुल मालिक का प्रथम स्पर्श (एक हृदय-स्पर्श अनुभव — जो मालिक की असीम दया और मेहर से प्रस्फुटित हुआ) कुछ अनुभव इतने आत्मिक होते हैं कि वे शब्दों से नहीं, केवल अंतःकरण की गहराई में ही महसूस किए जा सकते हैं। मेरे जीवन में भी ऐसा ही एक क्षण तब आया, जब मैंने पहली बार भीतर से मालिक जी के स्पर्श को अनुभव किया। मेरे दादा जी का मालिक जी के प्रति जो निःस्वार्थ प्रेम, भक्ति और समर्पण भाव था — वही मेरे बालमन में ऐसा गहरा संस्कार बनकर उतर गया, जिसे मैं आज भी अपने हृदय में संजोए हुए हूँ। उनका शांत चेहरा, संयमित जीवन और मौन तपस्या — मेरे लिए पहली जीवित सतसंग की पुस्तक बन गए। "दादा जी को देखकर जो भाव और संस्कार मेरे भीतर जन्मे — वे किसी उपदेश से नहीं, एक मौन आत्मिक छाया से उपजे थे। वह मालिक जी का पहला स्पर्श था — अमूल्य और अवर्णनीय।" इन्हीं संस्कारों के कारण, जब परम प्रिय परम गुरु डॉक्टर एम.बी. लाल साहब के प्रति भीतर ही भीतर एक गहन संबंध का अनुभव हुआ — तो ऐसा लगा मानो अंतःकरण में कोई भूली-बिसरी मधुर धुन फिर से जाग उठी हो। "पहली बार जब भीतर संपर्क की वह ...
Fatherhood of God & Brotherhood of Man.