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लक्जरी जीवन — अनुभव, संतुलन और सजगता

💎 लक्जरी जीवन — अनुभव, संतुलन और सजगता  जब हम “लक्जरी” शब्द सुनते हैं, तो अक्सर दिमाग में चमक‑दमक, महँगी चीज़ें, बड़े घर या ब्रांडेड वस्तुएँ आती हैं। लेकिन मेरी यात्रा और अनुभवों ने मुझे यह सिखाया कि असल लक्जरी इन सबके परे है। सच्ची विलासिता वह है जो हमें मन की शांति, समय की स्वतंत्रता और जीवन के गहरे अनुभव देती है। यह वह अवस्था है जब हम जीवन को बिना जल्दबाज़ी, बिना दबाव, और पूरी सजगता के साथ जीते हैं। अनुभव में छिपी विलासिता सिक्किम की घाटियों में बर्फ़‑भरी चोटियों का दृश्य, ज़ीरो पॉइंट की ठंडी हवा में साँस लेना, फूलों से भरी घाटियों में खो जाना — यह सब मुझे याद दिलाता है कि लक्जरी का असली आनंद अनुभव में है। राजाबरारी के जंगलों में बिताए गए कुछ दिन और परिवार के साथ साझा किए पल यह सिखाते हैं कि जीवन का सबसे बड़ा निवेश समय और संबंधों में होता है। महँगी वस्तुएँ हमें तात्कालिक खुशी दे सकती हैं, लेकिन अनुभव और संबंध स्थायी संतोष और गहराई देते हैं।  लक्जरी का चार सूत्र संतोष: कम में भी खुशी पाना और अधिक की लालसा को शांत करना। स्वतंत्रता: अपने समय और क्षणों पर नियंत्रण रखना। अर्थपू...

60 की उम्र – जीने का सही समय!

60 की उम्र – जीने का सही समय!  ~  आनंद किशोर मेहता "अब अपनी ज़िंदगी को नए रंग दो, क्योंकि असली मज़ा अब शुरू होता है!" 60 की उम्र तक हम ज़िंदगी की भाग-दौड़ में इतना उलझ जाते हैं कि जीना ही भूल जाते हैं। जिम्मेदारियों का बोझ, समाज की अपेक्षाएँ, बच्चों का भविष्य, करियर की ऊँचाइयाँ—इन सबमें उलझते-उलझते कब जवानी बीत जाती है, पता ही नहीं चलता। लेकिन क्या ज़िंदगी का सफर यहीं खत्म हो जाता है? बिल्कुल नहीं! "अब समाज की नहीं, अपने दिल की सुनो—क्योंकि असली जीवन अब शुरू होता है!" 60 की उम्र तो असल में जीवन का स्वर्णिम दौर है। यह वह समय है जब आप अपनी मर्जी से जी सकते हैं, अपने अधूरे सपनों को पूरा कर सकते हैं और ज़िंदगी को अपने अंदाज में फिर से जीने का आनंद उठा सकते हैं। 1. अब दुनिया की चिंता छोड़ो, खुद को जियो! अब तक हमने अपने परिवार, समाज और ज़िम्मेदारियों को निभाने में अपनी इच्छाओं को कहीं पीछे छोड़ दिया था। लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपने मन की सुनें! ✔ क्या आप कभी पहाड़ों पर घूमना चाहते थे? ✔ क्या आपको पेंटिंग, संगीत या नृत्य का शौक था? ✔ क्या कभी बिना किसी फ...