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Showing posts with the label आत्मिक शांति

जब जीवन के सभी सहारे टूट जाएँ, तब एक ही सत्य रह जाता है — रा धा/ध: स्व आ मी दयाल की दया व मेहर। 🙏

अब तो बस रा धा/ध: स्व आ मी दयाल, दूसरा न कोई 🙏 जीवन के रास्तों पर चलते-चलते जब सब सहारे बदल जाते हैं, जब अपने और पराये का भेद मिट सा जाता है, तब भीतर एक ही पुकार रह जाती है— अब तो बस  रा धा/ध: स्व आ मी  दयाल, दूसरा न कोई। यह केवल शब्द नहीं, यह उस आत्मा की पुकार है जो संसार की भीड़ से थक चुकी है, और अब केवल उस परम दयाल की शरण चाहती है जो बिना शर्त प्रेम करता है, बिना भेद के संभालता है। कभी लगता है कि सब कुछ हमारा है, पर समय सिखा देता है कि वास्तव में अपना कोई नहीं, सिर्फ एक सत्य स्थायी है— रा धा/ध: स्व आ मी  दयाल की कृपा। जब मन अशांत होता है, जब जीवन प्रश्नों से भर जाता है, तब भीतर से एक ही आवाज उठती है— अब तो बस वही हैं…  रा धा/ध: स्व आ मी  दयाल, दूसरा न कोई। निष्कर्ष: यह भाव हमें संसार से दूर नहीं करता, बल्कि भीतर की शांति से जोड़ता है, जहाँ केवल एक ही सहारा रह जाता है— प्रेम, कृपा और परम दाता दयाल की उपस्थिति।  🙏  रा धा/ध: स्व आ मी  दयाल सब पर दया व मेहर करें  A K Mehta  Explore more below 👇  https://anan...

निःस्वार्थता और समर्पण: सच्ची शांति की राह

निःस्वार्थता और समर्पण: सच्ची शांति की राह ~ आनंद किशोर मेहता जीवन केवल संयोग नहीं, बल्कि एक साधना है—जिसका लक्ष्य है आंतरिक शांति, स्थायी संतोष और व्यापक उद्देश्य में स्वयं को विलीन करना। यह यात्रा तब शुरू होती है जब मनुष्य अपने ‘स्व’ की सीमाओं को पहचानता है और अहंकार, वासनाओं व निजी आकांक्षाओं की दीवारें तोड़कर व्यापक चेतना से जुड़ता है। सेवा का सौंदर्य: जहाँ ‘मैं’ नहीं, केवल ‘तू’ होता है जब कोई व्यक्ति सेवा को जीवन का उद्देश्य बना लेता है, तब वह दुनिया की प्रतिक्रिया से स्वतंत्र हो जाता है। न प्रशंसा उसे लुभाती है, न आलोचना विचलित करती है। उसका कर्म निष्कलुष, निस्वार्थ और निर्मल हो जाता है। ऐसे व्यक्ति का अस्तित्व स्वयं ही सुकून और प्रेरणा फैलाता है। "जहाँ कर्म सेवा बन जाए, वहाँ जीवन परम सत्य से एकरूप हो जाता है।" समर्पण: जीवन को दिशा देने वाला मौन संगीत समर्पण हार नहीं, बल्कि स्वीकार की पराकाष्ठा है। यह वह क्षण है जब मनुष्य जान लेता है कि वह संपूर्ण व्यवस्था का एक विनम्र यंत्र है—ना स्वामी, ना संचालक, केवल एक विश्वासी। तब उसका प्रत्येक कार्य आभार, विश्वास और निष्ठा...