राजाबरारी के बच्चों: खेल, शिक्षा और संस्कार 🌿⚽ 📚 राजाबरारी गांव की शांत गलियों में बच्चों की हँसी और खेल की मस्ती जीवन की सरलता और मासूमियत का आइना हैं। हर दौड़, हर किक, हर मुस्कान हमें याद दिलाती है कि सच्ची खुशी हमेशा बड़े अनुभवों में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे, सहज पलों में मिलती है। ये बच्चे सिर्फ खेल में ही नहीं, बल्कि अपने अध्ययन में भी पूरी लगन और अनुशासन के साथ जुटे हैं। दयालबाग के संस्कारों के साथ, दयालबाग राजाबरारी स्कूल में उनकी पढ़ाई उनके चरित्र और मूल्यों को भी मजबूत बना रही है। खेल, शिक्षा और संस्कार का यह संतुलन उन्हें जागरूक, सशक्त और संतुलित व्यक्तित्व देने में मदद करता है। राजाबरारी के ये बच्चे हमें यह सिखाते हैं कि जीवन की असली सफलता और खुशी ज्ञान, मस्ती और संस्कारों के संगम में है। 🌿✨ खेल, हँसी और संस्कार — यही है राजाबरारी के बच्चों की असली पहचान। आनन्द किशोर मेहता
खुद से जुड़ना: सबसे बड़ी ताकत हम अक्सर खुद की तुलना दूसरों से करते हैं, अपनी कमियों पर ध्यान देते हैं और अपनी क्षमताओं को कम आंकते हैं। यही वह समय है जब हम अपने सबसे बड़े दुश्मन — खुद — से दूरी बना लेते हैं। लेकिन सच यही है कि हमारी असली ताकत और सफलता का स्रोत हमारी अपनी आत्म-विश्वास और आत्म-स्वीकृति में छिपा है। जब हम खुद पर भरोसा करते हैं, तो हर चुनौती छोटी लगने लगती है और हर कदम आत्मविश्वास से भरा होता है। खुद से जुड़ना कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि अपनी पहचान और अपनी शक्ति को समझने का तरीका है। अपने विचारों, भावनाओं और इच्छाओं के प्रति ईमानदार रहना हमें मजबूत बनाता है और जीवन में सही दिशा दिखाता है। याद रखें: “सबसे बड़ी गलती, खुद से ही दूर होना। खुद पर भरोसा रखो, यही असली ताकत है।” Anand Kishor Mehta