सम्माननीय कार्यकर्ता सदस्यगण, राजाबरारी: सेवा और प्रेरणा का आदर्श इधर पिछले वर्ष से मुझे कई बार राजाबरारी जाने का तथा वहाँ की सेवाओं में सहयोग करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हर बार वहाँ जाकर जो अनुभव मिला, वह मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक और हृदय को गहराई से स्पर्श करने वाला रहा। दयालबाग के राजाबरारी क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता सदस्यों का समर्पण, अनुशासन और विशेष रूप से उनकी अत्यंत विनम्र एवं निस्वार्थ सेवा ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। वहाँ की सेवाओं को निकट से देखकर यह अनुभव हुआ कि यह केवल कार्य नहीं, बल्कि सच्चे अर्थों में सेवा, साधना और समर्पण की एक सजीव अभिव्यक्ति है। प्रातःकाल के समय भाईयों और बहनों को पूर्ण अनुशासन और निष्ठा के साथ खेतों में सेवा करते देखना वास्तव में अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव है। इतनी सुबह, शांत और समर्पित भाव से सेवा में लगे रहना निस्वार्थ सेवा का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसी प्रकार, दयालबाग राजाबरारी के विस्तृत जंगल क्षेत्र की देखरेख और संरक्षण का कार्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण सेवा के रूप में किया जा रहा है। प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति यह...
खामोशी के पीछे की सच्चाई कभी-कभी इंसान थोड़ा थक सा जाता है। जीवन की जिम्मेदारियाँ, अनुभव और समय की भागदौड़ उसे पहले की तरह खुलकर बोलने नहीं देतीं। तब वह धीरे-धीरे कम बोलने लगता है। बाहर से देखने पर लगता है जैसे वह दूर हो गया हो, लेकिन सच अक्सर इससे अलग होता है। कम बोलना या चुप रहना यह नहीं बताता कि किसी ने रिश्ते निभाना छोड़ दिया है। दिल के भीतर आज भी वही अपनापन रहता है, वही यादें और वही परवाह भी। बस अब हर भावना को शब्दों में कहने की आदत थोड़ी कम हो जाती है। याद तो सबकी आज भी आती है, चिंता भी सबकी होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले जो बातें कह दी जाती थीं, अब वे मन में ही रह जाती हैं। कब याद किया, कितना याद किया — यह बताने की जरूरत अब कम महसूस होती है। समय के साथ इंसान यह समझने लगता है कि हर भावना को जताना जरूरी नहीं होता। कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनकी गहराई शब्दों से नहीं, बल्कि खामोशी से भी महसूस की जा सकती है। A K Mehta