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ब्लॉक प्रिंटिंग: सेवा से आत्मनिर्भरता और रोजगार की दिशा | Block Printing as Service & Opportunity

ब्लॉक प्रिंटिंग को मैंने सेवा के रूप में शुरू किया था। और आज भी यह मेरे लिए सेवा के रूप में ही चल रहा है। शुरुआत में यह सिर्फ एक छोटा सा प्रयास था, लेकिन धीरे-धीरे समझ आया कि इसमें सिर्फ कला नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर भी छिपा है। अगर इसे सही तरीके से आगे बढ़ाया जाए, तो यह छोटे स्तर से लेकर बड़े उद्योग तक का रूप ले सकता है और कई लोगों के लिए रोजगार का साधन बन सकता है। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें घर में रहने वाली महिलाएँ भी आसानी से जुड़ सकती हैं। वे अपनी जिम्मेदारियों के साथ केवल 2–3 घंटे समय देकर एक सम्मानजनक आय कमा सकती हैं। मेरे लिए यह केवल एक काम नहीं है, बल्कि सेवा, रोजगार और आत्मनिर्भरता को जोड़ने का एक साधन है। अगर इसे सही दिशा और सहयोग मिले, तो यह समाज में कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।  I started block printing as a form of service, and even today I continue it with the same intention. It began as a small effort, but over time I realized that it is not just an art, but also a big opportunity. If developed in the right way, it can grow from a...
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Parents Are Not Property, But Responsibility | Deep Social Thought by Anand Kishore Mehta

माता-पिता: जायदाद नहीं, ज़िम्मेदारी हैं | एक गहन सामाजिक विचार आज के भौतिकतावादी युग में रिश्तों को भी संपत्ति की तरह तौला जाने लगा है—मालिकाना हक, बंटवारा और लाभ के आधार पर। कभी जो माता-पिता हमारे संस्कारों और भावनाओं की नींव थे, उन्हें धीरे-धीरे विरासत का हिस्सा समझा जाने लगा है, जिम्मेदारी का नहीं। हम अक्सर देखते हैं कि परिवार जायदाद के लिए अदालतों तक पहुँच जाते हैं, लेकिन जब अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल की बात आती है, तो वही लोग पीछे हट जाते हैं। यह केवल कानूनी या आर्थिक समस्या नहीं है—यह समाज की भावनात्मक और नैतिक गिरावट का संकेत है। विरासत बांटी जा सकती है। लेकिन देखभाल, सम्मान, समय और प्रेम—इन्हें संपत्ति की तरह विभाजित नहीं किया जा सकता, इन्हें जीना पड़ता है। जब बच्चे अपने माता-पिता को अपने बुज़ुर्गों की सेवा करते देखते हैं, तो वे सीखते हैं कि जिम्मेदारी एक मूल्य है। लेकिन जब वे उपेक्षा देखते हैं, तो वे सीखते हैं कि बुज़ुर्ग बोझ हैं। इस सोच को बदलने की आवश्यकता है। माता-पिता कोई बोझ नहीं हैं। वे केवल सुविधा के अनुसार निभाई जाने वाली जिम्मेदारी नहीं हैं। वे हमारे जीवन की जड़ें...

जीवन में करुणा और सकारात्मक सोच | शांत मन और बेहतर समझ – A K Mehta

एक सरल और सकारात्मक सोच जिंदगी में हम बहुत सारे लोगों से मिलते हैं। हर इंसान अलग होता है — उसकी सोच, उसका अनुभव और उसकी परिस्थितियाँ भी अलग होती हैं। कई बार लोग हमारे हिसाब से नहीं सोचते या व्यवहार करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे समझ आता है कि हर इंसान अपने अनुभव और स्थिति के अनुसार ही प्रतिक्रिया देता है। जब हम यह बात समझ लेते हैं, तो हमारे अंदर गुस्सा कम होने लगता है और समझ बढ़ने लगती है। और उसकी जगह एक सुंदर भावना आती है — करुणा और सकारात्मक सोच। करुणा का मतलब यह नहीं कि गलत बात को सही मान लिया जाए, बल्कि यह समझना है कि हर व्यक्ति अपनी परिस्थिति में जीवन को समझने की कोशिश कर रहा है। जब हम इस सोच को अपनाते हैं, तो मन हल्का होता है, तनाव कम होता है, और जीवन ज्यादा शांत और आसान लगने लगता है। शायद जीवन की सबसे अच्छी सीख यही है — हर स्थिति में शांत रहना, अच्छा सोचना, और सकारात्मक बने रहना। — A K Mehta

Motivation vs Discipline: लंबी सफलता का रहस्य | Consistency & Success Mindset | A K Mehta

Motivation vs Discipline लोग अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि लंबी सफलता के लिए क्या ज्यादा जरूरी है — Motivation या Discipline? समय के साथ एक बात साफ समझ आती है कि Motivation सिर्फ हमें शुरू करवाता है, लेकिन Discipline हमें आगे बढ़ाता रहता है। Motivation थोड़े समय के लिए अच्छा लगता है। यह हमें ऊर्जा देता है और शुरुआत करने में मदद करता है। लेकिन जब वह जोश कम हो जाता है, तब असली साथ Discipline देता है। सच्चाई यह है कि सफलता भावनाओं पर नहीं, बल्कि लगातार किए गए काम पर निर्भर करती है। कोई भी इंसान एक दिन मेहनत कर सकता है जब वह प्रेरित हो। लेकिन असली फर्क तब पड़ता है जब कोई इंसान बिना मन के भी अपने काम को रोज करता रहता है। Discipline का मतलब है: बिना बहाने काम करना बिना तारीफ के भी लगे रहना धीरे-धीरे लेकिन लगातार आगे बढ़ते रहना हर क्षेत्र में — पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस, फिटनेस या जीवन — जो लोग Discipline अपनाते हैं, वे धीरे-धीरे आगे निकल जाते हैं।  Motivation शुरुआत करता है, लेकिन Discipline सफलता को पूरा करता है। Motivation vs Discipline (English) People often ask what is more...

गलती स्वीकार करना: आगे बढ़ने की असली शुरुआत | Accepting Mistakes & Personal Growth

🇮🇳 गलती स्वीकार करना गलती हर इंसान से होती है। लेकिन इंसान की असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपनी गलती से भागता है… या उसे स्वीकार करता है। गलती मान लेना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता की निशानी है। क्योंकि जो व्यक्ति अपनी भूल स्वीकार कर लेता है, वही खुद को बेहतर बना सकता है। गलती छुपाने से कुछ समय के लिए सच दब सकता है, लेकिन भीतर की बेचैनी बढ़ती जाती है। वहीं एक सच्ची स्वीकारोक्ति रिश्तों में भरोसा और मन में शांति लेकर आती है। अहंकार हमें सही दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन विनम्रता हमें सच के करीब ले जाती है। जो इंसान अपनी गलती मान लेता है, लोग उस पर और अधिक विश्वास करने लगते हैं। क्योंकि सत्य स्वीकार करने का साहस हर किसी में नहीं होता। गलती मान लेना हार नहीं है… यह स्वयं को सुधारने और आगे बढ़ने की शुरुआत है। 🌿 Accepting Mistakes Every human makes mistakes. But a person’s true character is revealed by whether they hide their mistakes… or accept them. Accepting a mistake is not weakness; it is a sign of maturity and wisdom. Because only the one who accepts thei...