Skip to main content

Posts

A Reality of Human Importance

चार दिन गायब होकर देख लीजिए — दुनिया वैसी ही चलती रहती है। हम अक्सर यह मान लेते हैं कि हम दूसरों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। हमें लगता है कि हमारे बिना बहुत कुछ रुक जाएगा। लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग होती है। इस दुनिया में हर व्यक्ति की अहमियत उसकी जरूरत के अनुसार होती है। जब तक हमारी उपस्थिति उपयोगी है, तब तक हमें महत्व मिलता है। जैसे ही परिस्थितियाँ बदलती हैं, प्राथमिकताएँ भी बदल जाती हैं। समय का स्वभाव भी यही है — वह किसी के लिए नहीं रुकता। न रुकी वक़्त की गर्दिश, न ज़माना बदला, पेड़ सूखा तो परिंदों ने ठिकाना बदला। इस सच्चाई को समझना निराश होने के लिए नहीं, बल्कि जागरूक होने के लिए है। इसलिए अपनी अहमियत दूसरों की ज़रूरतों से नहीं, बल्कि अपने कर्म, अपने चरित्र और अपनी सोच से बनाइए। यही जीवन को सच में अर्थपूर्ण बनाता है। — A. K. Mehta
Recent posts

Your Thinking Is Your Greatest Power: The Real Key to Growth

Most people think success comes from skills. But the real power behind success is the way you think. People often say, “Skills are important.” And they are. Skills help you perform a task well. But the real difference in life is not created by skills alone — it is created by the way you think . Some people simply complete their work . Others ask themselves, “How can this be done better?” Some people only follow instructions . Others try to understand the problem and create solutions . This small shift in thinking creates a powerful difference. It is the difference between doing a job and building a meaningful career , between being ordinary and becoming exceptional . 📈 True growth begins when you develop the habit of learning, reflecting, and improving every day . Today I ask myself a simple question: Am I just doing my work… or am I improving the way I think every day? Because when your thinking evolves, your actions, decisions, and opportunities begin to change. That is the ...

राजाबरारी: सेवा, समर्पण और प्रेरणा का आदर्श — सम्माननीय कार्यकर्ता सदस्यगण

सम्माननीय कार्यकर्ता सदस्यगण, राजाबरारी: सेवा और प्रेरणा का आदर्श इधर पिछले वर्ष से मुझे कई बार राजाबरारी जाने का तथा वहाँ की सेवाओं में सहयोग करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हर बार वहाँ जाकर जो अनुभव मिला, वह मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक और हृदय को गहराई से स्पर्श करने वाला रहा। दयालबाग के राजाबरारी क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता सदस्यों का समर्पण, अनुशासन और विशेष रूप से उनकी अत्यंत विनम्र एवं निस्वार्थ सेवा ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। वहाँ की सेवाओं को निकट से देखकर यह अनुभव हुआ कि यह केवल कार्य नहीं, बल्कि सच्चे अर्थों में सेवा, साधना और समर्पण की एक सजीव अभिव्यक्ति है। प्रातःकाल के समय भाईयों और बहनों को पूर्ण अनुशासन और निष्ठा के साथ खेतों में सेवा करते देखना वास्तव में अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव है। इतनी सुबह, शांत और समर्पित भाव से सेवा में लगे रहना निस्वार्थ सेवा का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसी प्रकार, दयालबाग राजाबरारी के विस्तृत जंगल क्षेत्र की देखरेख और संरक्षण का कार्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण सेवा के रूप में किया जा रहा है। प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति यह...

कम बोलने का मतलब दूरी नहीं होता – खामोशी के पीछे की सच्चाई

खामोशी के पीछे की सच्चाई  कभी-कभी इंसान थोड़ा थक सा जाता है। जीवन की जिम्मेदारियाँ, अनुभव और समय की भागदौड़ उसे पहले की तरह खुलकर बोलने नहीं देतीं। तब वह धीरे-धीरे कम बोलने लगता है। बाहर से देखने पर लगता है जैसे वह दूर हो गया हो, लेकिन सच अक्सर इससे अलग होता है। कम बोलना या चुप रहना यह नहीं बताता कि किसी ने रिश्ते निभाना छोड़ दिया है। दिल के भीतर आज भी वही अपनापन रहता है, वही यादें और वही परवाह भी। बस अब हर भावना को शब्दों में कहने की आदत थोड़ी कम हो जाती है। याद तो सबकी आज भी आती है, चिंता भी सबकी होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले जो बातें कह दी जाती थीं, अब वे मन में ही रह जाती हैं। कब याद किया, कितना याद किया — यह बताने की जरूरत अब कम महसूस होती है। समय के साथ इंसान यह समझने लगता है कि हर भावना को जताना जरूरी नहीं होता। कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनकी गहराई शब्दों से नहीं, बल्कि खामोशी से भी महसूस की जा सकती है। A K Mehta 

अमेरिका का जीवन छोड़ आदिवासी क्षेत्र की सेवा – डॉ. ए. एस. रागिनी को सम्मान

अमेरिका का जीवन छोड़ आदिवासी क्षेत्र की सेवा – डॉ. ए. एस. रागिनी को सम्मान  महिला दिवस के अवसर पर हरदा में आयोजित एक प्रेरक कार्यक्रम में समाजसेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डीईआई राजाबरारी से जुड़ी शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. ए. एस. रागिनी को विशेष रूप से सम्मान प्रदान किया गया। डॉ. रागिनी का जीवन समर्पण और सेवा की एक प्रेरक कहानी है। विवाह के पश्चात उन्होंने अमेरिका का सुविधासंपन्न जीवन छोड़कर मध्यप्रदेश के हरदा जिले के आदिवासी क्षेत्र राजाबरारी को अपनी कर्मभूमि बनाया। पिछले लगभग 14 वर्षों से वे वहीं रहकर शिक्षा, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही हैं। ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण विषय पर उन्होंने अपना शोध कार्य भी पूर्ण किया है। साथ ही अनेक आदिवासी महिलाओं को विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है। उनका यह कार्य केवल शिक्षा या प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आत्मविश्वास, स्वावलंबन और सकारात्मक परिवर्त...

धीरे-धीरे उत्कृष्टता की ओर बढ़ता कार्य | धैर्य और निरंतर प्रयास की शक्ति

धीरे-धीरे उत्कृष्टता की ओर बढ़ता कार्य  जीवन का एक गहरा सत्य यह है कि महानता कभी भी अचानक नहीं बनती। हर बड़ा और प्रेरणादायक कार्य छोटे-छोटे प्रयासों, धैर्य, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की मजबूत नींव पर खड़ा होता है। जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को सच्चे मन, लगन और ईमानदारी से शुरू करता है, तो शुरुआत में उसके परिणाम साधारण ही दिखाई देते हैं। कई बार प्रगति धीमी लगती है और यह भी महसूस होता है कि रास्ता लंबा है। परंतु यही धीमी और स्थिर गति आगे चलकर मजबूती, स्थिरता और परिपक्वता का आधार बनती है। जो व्यक्ति धैर्य और विश्वास के साथ अपने कार्य को निरंतर बेहतर बनाता रहता है, वह हर दिन थोड़ा-सा आगे बढ़ता है। वह अपने अनुभवों से सीखता है, गलतियों को सुधारता है और अपने लक्ष्य की ओर शांत तथा स्थिर कदमों से चलता रहता है। यही निरंतरता साधारण प्रयासों को धीरे-धीरे उत्कृष्टता में परिवर्तित कर देती है। समय बीतने के साथ वही कार्य एक सुंदर, परिपक्व और प्रभावशाली रूप ले लेता है। लोग जब उसे देखते हैं तो आश्चर्य करते हैं और उसकी सराहना करते हैं। संसार अक्सर केवल अंतिम उपलब्धि को देखता है, लेकिन उस उपलब्धि के ...

विचारों से विकसित होती शिक्षा की नई दिशा

विचारों से विकसित होती शिक्षा की नई दिशा   शिक्षा केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं है; यह विचारों, अनुभवों और समझ के संतुलन से विकसित होने वाली एक जीवंत प्रक्रिया है। जब शिक्षा में सोचने, समझने और अनुभव करने का अवसर मिलता है, तब वह केवल ज्ञान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि व्यक्तित्व को भी आकार देती है। आज के समय में शिक्षा की नई दिशा वही है, जहाँ ज्ञान और जिज्ञासा , अनुशासन और स्वतंत्र सोच , तथा परंपरा और नवाचार के बीच संतुलन स्थापित किया जाता है। जब विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, अपने विचार व्यक्त करने और अनुभवों से सीखने के लिए प्रेरित किया जाता है, तब उनकी सीख अधिक गहरी और सार्थक बन जाती है। एक सच्चे शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होती। वह विद्यार्थियों के विचारों को सुनता है, उन्हें समझता है और उनकी सोच को सकारात्मक दिशा देता है। इस प्रकार शिक्षा एक संवाद बन जाती है, जहाँ शिक्षक मार्गदर्शक होता है और विद्यार्थी सक्रिय सीखने वाले। प्रकृति भी हमें यही संदेश देती है— जड़ें धरती में गहरी हों और दृष्टि आकाश की ओर। उसी प्रकार शिक्षा का आधार मूल्यों में होना चाहिए और उसक...