जीवन की शांत गूंज हर सुबह बिना शोर के आती है, हथेलियों में उम्मीद की कोमल रोशनी लिए। जो देख सके, वही समझ पाए— नया दिन स्वयं एक मौन संदेश है। मौन की गहराई में ही शक्ति का निवास होता है। जहाँ शब्द थक जाते हैं, वहीं आत्मा बोल उठती है। जो शांत रहकर स्वयं को थाम ले, वह तूफ़ानों में भी अपनी दिशा खोज लेता है। समय हमें बदलने नहीं, स्वयं को समझने का अवसर देता है। हर क्षण धीरे से पूछता है— क्या तुम आज कल से बेहतर हो? कम शब्द, गहरे अर्थ— यही जीवन की सच्ची भाषा है। जो एक बार स्वयं को जीत ले, उसके भीतर हार कभी ठहर नहीं पाती। और जब लगे कि सब समाप्त हो गया है, तो ठहरकर सुनना— क्योंकि हर अंत के भीतर एक नई शुरुआत शांत गूंज बनकर जन्म लेती है। — Anand Kishor Mehta जागता व्यक्तित्व अँधेरों से मत डरना, हर दिल में उजाला है। सत्य और धैर्य की राह पकड़ो, स्वयं की रोशनी जगाओ। हर कदम, हर अनुभव, तेरा दीपक और प्रखर करे। अपने व्यक्तित्व को चमकने दो, दुनिया को भी दिशा दिखाए। — आनंद किशोर मेहता सपनों के पार सुख-दुख की दुनिया से परे, जहाँ मन का शोर न पहुँचे, वहाँ उठते हैं शांत विचार, जैसे ...
प्रतिक्रिया नहीं, परिणाम महत्वपूर्ण हैं। आज के आधुनिक कार्यक्षेत्र में संवाद के कई साधन हैं—फोन कॉल, ईमेल, संदेश या बैठकें। लेकिन केवल प्रतिक्रिया देना ही सफलता की गारंटी नहीं है। असली मूल्य तब सामने आता है जब किसी भी संवाद के बाद कार्य भी प्रभावी रूप से पूरा हो। परिणाम के बिना, केवल प्रतिक्रियाएँ समय और प्रयास की बर्बादी बन जाती हैं। प्रभावी संवाद का अर्थ है जवाब देना ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ कार्य को आगे बढ़ाना। जब प्रतिक्रिया कार्य में नहीं बदलती, तो संवाद केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। इसलिए किसी भी प्रणाली में प्रतिक्रिया और परिणाम—दोनों पर समान ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। संक्षेप में: प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है, लेकिन परिणाम अनिवार्य हैं। केवल बोलने या जवाब देने से काम पूरा नहीं होता—सच्ची सफलता तब मिलती है, जब कार्य का वास्तविक परिणाम सामने आए। – Anand Kishor Mehta