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विश्व आज: संकट, शांति और हमारी जिम्मेदारी | A K Mehta

विश्व आज: संकट और हमारी जिम्मेदारी  — आनंद किशोर मेहता आज का विश्व गहरे संकट में है। घरों में बेचैनी, गलियों में तनाव और समाज में दूरी बढ़ती जा रही है। कहीं युद्ध की आहट है, कहीं शब्दों की हिंसा, और कहीं मन टूट रहा है। पर इस अंधकार में भी दयालुता और करुणा की छोटी-छोटी रोशनियाँ जल रही हैं, जो उम्मीद का रास्ता दिखाती हैं। शांति केवल युद्ध के बंद होने का नाम नहीं है। सच्ची शांति हमारे भीतर से शुरू होती है। जब मन शांत, विचार संयमित और दृष्टि समझ से भरी होती है, तभी यह शांति परिवार, समाज और विश्व तक पहुँचती है। आज हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है— स्वयं शांत रहना। केवल शांति की बातें करना पर्याप्त नहीं; उसे अपने व्यवहार में उतारना ज़रूरी है। किसी की बात ध्यान से सुनना, पीड़ा समझना, मदद का हाथ बढ़ाना और छोटे मतभेदों में संयम दिखाना—यही शांति का असली स्वरूप है। विश्व शांति के लिए तीन स्तर पर प्रयास करना होगा: व्यक्तिगत: भीतर की अशांति पहचानना, आत्म-निरीक्षण करना और धैर्य अपनाना। सामाजिक: परिवार और समुदाय में सहयोग, सहानुभूति और अपनत्व बढ़ाना। वैश्विक: संवाद, न्याय और समानता ...