कुछ बच्चे 6–7 से शुरू हुए थे… आज वही बच्चे अपने जीवन की पहचान बना चुके हैं। 34 साल पहले जब मैंने यह छोटी सी ट्यूशन शुरू की थी, तब मेरे मन में कोई बड़ा सपना नहीं था… बस एक ही सोच थी—हर बच्चा पढ़े, आगे बढ़े और अपने जीवन में कुछ अच्छा कर सके। शुरुआत बहुत छोटी थी… कुछ ही बच्चे थे। धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई और लगभग 80 बच्चों तक पहुँची। उस समय हालात अलग थे… संसाधन कम थे, सुविधाएँ नहीं थीं, और कई माता-पिता की सोच भी सीमित थी। अक्सर यही कहा जाता था—“पढ़कर क्या होगा?” लेकिन समय ने सब बदल दिया। आज वही क्षेत्र है… जहाँ पहले शिक्षा को लेकर संकोच था, वहाँ अब हर माता-पिता अपने बच्चे के भविष्य को लेकर जागरूक है। हर कोई चाहता है कि उसका बच्चा पढ़े, आगे बढ़े और एक अच्छी पहचान बनाए। और यह सबसे बड़ी खुशी की बात है कि मैंने अपने ही सामने बच्चों को बदलते हुए देखा है। कोई बच्चा आज शिक्षक है, कोई सेना में देश की सेवा कर रहा है, कोई नौकरी करके अपने परिवार को संभाल रहा है, और कोई खेल के क्षेत्र में मेहनत से अपनी अलग पहचान बना रहा है। ये केवल सफलताएँ नहीं हैं… ये उस भरोसे का परिणाम हैं ...
Educational and motivational blog by Anand Kishor Mehta, sharing teaching methods, personal experiences, and positive thinking insights.