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राधास्वामी सतसंग दयालबाग में कृषि सेवा का महापर्व

कृषि सेवा का पावन स्वरूप राधास्वामी सतसंग दयालबाग में कृषि कार्य एक पावन सेवा के रूप में प्रतिदिन सैकड़ों सेवकों द्वारा समर्पण भाव से किया जाता है। दयालबाग की आत्मनिर्भर जीवन शैली में जैविक कृषि और डेयरी को विशेष महत्व प्राप्त है। फसलों की कटाई एक महोत्सव यहाँ रबी और खरीफ की फसलों को एक त्यौहार के रूप में सामूहिक सहभागिता के साथ मनाया जाता है। विशेष रूप से गेहूं एवं धान की कटाई एक भव्य महोत्सव का रूप ले लेती है, जिसमें आठ से दस हजार अनुयायी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। इस दौरान आधुनिक हार्वेस्टर का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि सेवक अपने हाथों से फसल की कटाई कर सेवा, श्रम और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। सेवा में समानता का भाव यहाँ न कोई ऊँच-नीच का भेद है, न पद-प्रतिष्ठा का अंतर-चाहे उद्योगपति हों, आईएएस अधिकारी, सीईओ या साधारण जन, सभी एक समान भाव से खेतों में कंधे से कंधा मिलाकर कृषि सेवा करते हैं, जहाँ मानवता और समर्पण ही सबसे बड़ा परिचय बन जाता है। विभिन्न राज्यों से सहभागिता इसी पावन सेवा में सहभागिता हेतु आज राजाबरारी और मोगराधाना से 115 राधास्वामी सतसंग के अनुया...

दयालबाग: “खेत सिक्युरिटी सेवा की झलक” 2024

दयालबाग: “खेत सिक्युरिटी सेवा की झलक”  AUTHOR: ANAND KISHOR MEHTA Gmail: pbanandkishor@gmail.com   कविता: दयालबाग: “खेत सिक्युरिटी सेवा की झलक”.   (सेवा के पावन अनुभवों पर आधारित एक सहज और सुंदर कविता).                    — आनन्द किशोर मेहता सेवा का जब अवसर मिला, मन प्रेम और आनंद में झूमा। पावन खेतों की इस धरा पर, हर क्षण अमृत सा लगा। हरियाणा–राजस्थान संग सटा, यह समर्पण का पुण्य शिविर। जहाँ प्रेमी जुटे निरंतर, सेवा की लय में रमे। बिना विश्राम, बिना अवकाश, हर पल सेवा में डूबे। जहाँ चरण पड़े मालिक के, वहीं खिल उठी प्रेम की आभा। यमुना की लहरों पर नौका-विहार, सेवा ने और रस भर दिया। यमुना तीरे सेवा में मग्न, स्वयं को हम भूल गए। सुबह, दोपहर, शाम और रात, सेवा का क्रम यूँ चलता रहा। एक गज की दूरी से दर्शन, प्रेम-सागर में समा गए। कृपा से धन्य हुआ अवसर, हृदय में उत्साह अमर। हे मालिक! दया बनाए रखना, प्रेम और भक्ति सदा खिले। (दिनांक: 23 जून २०२४) दयालबाग: “खेत सिक्युरिटी सेवा की झलक” (भदेजी सेंटर की कहानी)  सतसंग...