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Rajabarari Hindi Poetry Blog | Nature, Seva & Inspirational Thoughts






एक सोच 

जीवन एक बहती धारा है,
हर पल नया इशारा है।

गिरकर जो फिर संभल जाए,
वही सच्चा सितारा है।

धूप मिले तो मत इतराना,
छाँव मिले तो मत घबराना।

मुश्किल राहें रोक न पाएँ,
हौसलों को बस जगाना।

सपनों को सच करना सीखो,
मेहनत से नाता रखना।


अपने कर्मों से दुनिया में,
खुद की पहचान बनाना। ✍️
— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪

एहसास की कीमत 

अल्फाज़ तभी असर दिखाते हैं,
जब दिल से निकलकर आते हैं।

सिर्फ शब्दों का खेल नहीं,
इनमें जज़्बात भी समाते हैं।

सच्चाई की खुशबू हो जिनमें,
वो हर दिल को छू जाते हैं।


झूठी बातें पलभर चमकें,
सच्चे लफ़्ज़ अमर हो जाते हैं। ✍️
— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪

राजाबरारी की अमृत बेला 

रात की चादर ओढ़े पर्वत,
जब निद्रा में खो जाते हैं।
तब राजाबरारी की वादियों में,
भक्ति के दीप जल जाते हैं। 🙏

भोर तीन बजे से सजती है,
सूरज की पहली आभा तक।
सेवा, सिमरन और मौन यहाँ,
रूह को ले जाए दाता तक। 

न कोई शोर, न कोई हलचल,
बस नाम की अमृत धार बहे।
इन ठंडी-ठंडी पवन कोंपलों में,
मालिक का ही वास रहे। 

जब प्रथम किरण नभ को छूती,
रूह अंतर्मन से मुस्काती है।
राजाबरारी की यह भोर-सेवा,
जीवन में उजाला कर जाती है। 


— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️

राजाबरारी की अमृत बेला

तीन बजे की शांत बेला में,
जब जग सारा सोया हो।
राजाबरारी की पावन वादियों में,
सेवा का मधुर संयोग हुआ हो।

नभ में तारे दीप बने हों,
पर्वत मौन खड़े रहते हों।
सेवाधारी प्रेम और विनय से,
मालिक के चरणों में जुड़े हों।

ठंडी हवाओं के झोंकों में,
रा धा स्व आ मी धुन गूँज रही हो।
दयालबाग से मालिक के दर्शन संग,
भक्ति की ज्योति जल रही हो।

चारों ओर गहरी निस्तब्धता,
फिर भी भीतर उजियारा हो।
अमृतवेले की इस सेवा में,
हर मन को मालिक का सहारा हो।

हर छोटी सेवा इस बेला में,
रूह को निर्मल बनाती हो।
राजाबरारी की शांत धरती,
मालिक से मिलन कराती हो।

रा धा स्व आ मी

राजाबरारी — सेवा, प्रकृति और प्रेम की धरती 

पहाड़ों की गोद में बसा,
राजाबरारी का शांत जहान।
जहाँ हर सुबह अमृत बेला में,
गूंजे मालिक का पावन नाम।

हरे जंगल, ठंडी हवाएँ,
वादियों का मधुर संगीत।
प्रकृति जैसे खुद सजाती,
यहाँ प्रेम और सेवा की प्रीत।

कच्चे रास्तों पर चलते लोग,
चेहरों पर सादगी की चमक।
मेहनत जिनकी पूजा बन जाए,
जीवन जिनका निर्मल झलक।

कहीं खेतों में हल चलता है,
कहीं बैलगाड़ी की पहचान।
कहीं सेवा में झुकते माथे,
कहीं प्रेम से भरता इंसान।

राजाबरारी के छोटे घरों में,
बड़ी आत्मीयता रहती है।
दुख-सुख सब मिल बाँट के जीना,
यही यहाँ की सच्ची संपत्ति है।

सुबह की सेवा, शाम की वाणी,
सत्संग का मधुर उजियार।
दयालबाग की पावन शिक्षा,
बनती जीवन का आधार।

यहाँ प्रकृति भी ध्यान लगाती,
पर्वत जैसे साधक हों।
जंगल की खामोशी में भी,
रा धा स्वा आ मी स्वर गूंजते हों।

वीडियो में कैद हुए दृश्य,
सिर्फ तस्वीरें नहीं कहानी हैं।
राजाबरारी की मिट्टी में,
सेवा, प्रेम और मानवता की निशानी है।

🍀 — A K Mehta

 दिल को जो अच्छा लगे 

कभी किसी के सुंदर विचार,
मन में नई रोशनी भर जाते हैं।
कभी प्रकृति के शांत दृश्य,
आत्मा को सुकून दे जाते हैं।

किसी का निस्वार्थ कर्म,
चुपचाप प्रेरणा बन जाता है।
किसी की विनम्रता का भाव,
हर दिल को अपना बना जाता है।

कभी किसी की खामोशी भी,
बहुत कुछ कह जाती है।
किसी की सेवा और समर्पण,
मानवता की मिसाल बन जाती है।

किसी का सम्मान देने का तरीका,
संस्कारों की खुशबू बिखेरता है।
और किसी का सरल स्वभाव,
मन को भीतर तक छू लेता है।

इसलिए जो दिल को अच्छा लगे,
उसे अपनाने में संकोच कैसा।
अच्छाई जहाँ दिखाई दे जाए,
वहीं प्रेम और सम्मान वैसा। ✨
       𝓐 𝓴 𝓶𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️


✍️ मेरी कलम की आवाज़ 🌿

मैंने जो देखा, वही लिखा,
दिल ने जो महसूस किया।
जिंदगी के कच्चे रास्तों को,
शब्दों में महफ़ूज़ किया।

कभी धूप बहुत तेज़ मिली,
कभी छाँव भी कम पड़ी।
फिर भी उम्मीदों की लौ लेकर,
मेरी राह आगे बढ़ी।

लोग मिले कुछ अपने जैसे,
कुछ चेहरे बदल गए।
वक्त की हल्की बारिश में,
कई रिश्ते भी धुल गए।

लेकिन मेरी कलम ने हर पल,
सच्चाई का साथ निभाया।
जो दर्द भीतर चुप बैठा था,
उसे कागज़ पर उतारा।

मैं कोई बड़ा शायर नहीं,
बस दिल की बातें लिखता हूँ।
अपने छोटे-छोटे एहसासों को,
शब्दों में जीता लिखता हूँ। 

  𝓐 𝓴 𝓶𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️

 समय पर सुलह 

रिश्तों में जब धुआँ उठे,
तो चुप बैठना ठीक नहीं।
छोटी सी तकरार को बढ़ने देना,
किसी जीत की सीख नहीं।

बात अगर दिल तक पहुँच जाए,
तो दूरी बढ़ती जाती है।
मन के अंदर जली हुई चिंगारी,
धीरे-धीरे आग बन जाती है।

समय रहते जो हाथ बढ़ाएँ,
वही अपने कहलाते हैं।
जो टूटे दिल फिर जोड़ सकें,
वही रिश्ते निभाते हैं।

हर उलझन का हल होता है,
बस प्रेम से बात करनी होती है।
कड़वे शब्दों की आँधी रोको,
वरना आँखें भरनी होती हैं।

मालिक ने भी यही सिखाया,
मिल-जुल कर सब रहना है।
मनभेदों की दीवार गिराकर,
प्रेम का दीपक जलना है। 

रा धा स्व आ मी✨🙏

 धैर्य की धारा 

नदी ने कब कहा
कि मैं सबसे बलवान हूँ,
वह तो बस चलती रही
अपने लक्ष्य से अनजान नहीं।

पत्थरों ने रोका उसे,
पहाड़ों ने राहें मोड़ीं,
पर उसकी निरंतर चाल ने
हर बंदिश धीरे-धीरे तोड़ी।

वह गरजी नहीं आकाशों में,
न ही शक्ति का शोर किया,
बस बूंद-बूंद प्रयासों से
चट्टानों को कमजोर किया।

जीवन भी उसी नदी सा है,
जहाँ धैर्य सबसे बड़ा सहारा है।
जो हर दिन थोड़ा बढ़ते हैं,
वही अंत में ऊँचा चढ़ते हैं।

रफ्तार नहीं, निरंतरता जीतती है,
अटल कोशिश ही इतिहास लिखती है।
जो रुकते नहीं कठिनाइयों में,
मंज़िल स्वयं उनके पास दिखती है।

✨ इसलिए चलते रहिए,
चाहे राह कठिन क्यों न हो।
समय एक दिन आपके कदमों के लिए
नई दिशाएँ स्वयं बना देगा। 

✍️ — A.K. Mehta

  रुके नहीं हो तुम 

तुम रुके हुए नहीं हो,
बस आदतों की छाँव में बैठ गए हो… 
जहाँ हर दिन वही रास्ते,
वही सोच, वही बहाने
तुम्हें सुकून का भ्रम देते रहे।

शिकायतें होंठों पर रहीं,
पर कदम बदलाव से डरते रहे… 
क्योंकि नया रास्ता हमेशा
आराम नहीं,
हिम्मत माँगता है। 

हर बड़ा परिवर्तन
पहले भीतर तूफ़ान लाता है,
पुराने डर तोड़ता है,
और फिर एक नया इंसान बनाता है। 

जो बेचैनी आज महसूस हो रही है,
वही कल तुम्हारी ताकत बनेगी।
जो संघर्ष आज भारी लगता है,
वही कल तुम्हारी पहचान बनेगा। 

डर के उस पार ही
नई सुबह खड़ी है… 
बस एक कदम साहस का बढ़ाओ,
फिर देखना —
ज़िंदगी तुम्हें वहीं ले जाएगी
जहाँ जाने का सपना
तुमने कभी चुपचाप देखा था। 

✍️ 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪

तारीफ़ और तानों से परे 🌿

तारीफ़ों की धूप मिले
तो मन का आकाश खिल उठता है,
पर तानों की एक छोटी आँधी में
वही मन क्यों बिखर जाता है?

क्यों हम अपना मूल्य
दूसरों की नज़रों में खोजते हैं,
जो आज हमारी प्रशंसा करते हैं,
कल वही हमें परखते हैं।

सच तो यह है —
आत्मविश्वास किसी की दी हुई वस्तु नहीं,
यह भीतर जलता वह शांत दीप है
जो अंधेरों में भी बुझता नहीं। ✨

लोग समझें या गलत समझें,
तालियाँ दें या मौन रहें,
जो स्वयं का हाथ थामना सीख गया,
वह हर परिस्थिति में अडिग रहे। 🌊

इसलिए खुद को इतना मजबूत बनाओ
कि शब्द तुम्हें घायल न कर पाएं,
और अपनी पहचान ऐसी बनाओ
कि समय भी उसे मिटा न पाए। 🚩

✍️ 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪

तेरा आसरा 

हे मेरे दाता दयाल,
मैं शब्दों से खाली हूँ,
ना भक्ति का दीप जला पाया,
ना मन को संभाल पाया हूँ।

चलते-चलते इस दुनिया में
कितने भ्रमों में खो गया,
तेरी राह तो सामने थी,
पर मैं खुद से ही दूर हो गया।

ना कोई गुण, ना कोई ताकत,
ना कोई ऊँचा नाम है,
बस तेरे चरणों की धूल ही अब
मेरा सच्चा सम्मान है।

जब-जब मन ने ठोकर दी,
तूने फिर भी थाम लिया,
मेरे हर काले कर्मों पर भी
अपनी दया का नाम दिया।

अब और कुछ नहीं चाहिए,
ना दुनिया का कोई सहारा,
बस इतना कर दे मालिक —
तेरा हो जाए ये जीवन सारा।

जहाँ रखे, जैसे रखे,
तेरी रज़ा में खुश रहूँ,
हर साँस में तेरा नाम रहे,
और तुझमें ही मैं लीन रहूँ।

 रा धा स्व आ मी 🙏

 ये राजाबरारी है साहब… 

ये राजाबरारी है साहब…
यहाँ की मिट्टी में अपनापन है,
हवाओं में सुकून है,
और लोगों के दिलों में
आज भी इंसानियत ज़िंदा है।

यहाँ मन लगाने की कोशिश नहीं करनी पड़ती,
बस एक बार ठहर जाइए…
मन खुद-ब-खुद
यहीं बस जाता है साहब। 

यहाँ समय घड़ी से नहीं,
लोगों के अपनेपन से चलता है।
कच्चे रास्ते हैं,
सादा जीवन है,
पर दिल इतने साफ़ हैं कि
हर मुसाफ़िर यहाँ
अपना सा महसूस करता है।

सुबह पक्षियों के गीत गूँजते हैं,
और शाम चूल्हों के धुएँ में
सुकून उतर आता है।

संघर्ष यहाँ आज भी हैं,
पर हौसले कभी कम नहीं होते।
टूटकर भी मुस्कुराना
यहाँ के लोगों की पहचान है।

और सबसे बड़ी बात तो यह है साहब…
यहाँ के कण-कण में
मालिक की याद बसती है। 

शहरों की चमक बहुत देखी,
पर जो चैन राजाबरारी में मिला,
वो कहीं और नहीं मिला। 🌾

— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪

एक दिन तुम ठहर कर देखोगे,
बीते रास्तों की धूल में,
अपने ही कदमों के निशान… 📖

और फिर हल्की सी मुस्कान आएगी,
उस चेहरे को याद करके 🌧️
जो कभी टूटकर बिखर जाना चाहता था।

उसे कहाँ पता था 🌌
कि अंधेरों के ठीक पीछे
उजालों का दरवाज़ा खुलने वाला है 💥

हर ठोकर एक सीख थी,
हर आँसू एक शक्ति,
हर इंतज़ार किसी नए सवेरा की तैयारी था ✨

इसलिए चलते रहो…
भरोसा मत छोड़ो 🧠
सपनों को फिर से गढ़ते रहो 📊
हिम्मत के साथ आगे बढ़ते रहो 💪

क्योंकि कई बार,
ज़िंदगी का अगला पन्ना ही 🌅🔥
पूरी कहानी बदल देता है।

मौन की शक्ति

मूर्खों को मत बताना
कि तुम क्या हो।
वे सत्य नहीं समझेंगे,
बस पत्थर उठाएँगे।

जो स्वयं अंधेरों में जीते हैं,
उन्हें प्रकाश चुभता है।
जो सोच से छोटे होते हैं,
उन्हें हर ऊँचाई खटकती है।

महानता कभी
शोर नहीं मचाती,
उसकी खामोशी ही
उसका परिचय होती है।

मौन रहो,
समय को बोलने दो।
क्योंकि जब सूरज उगता है,
तो उसे किसी परिचय की आवश्यकता नहीं होती।

𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪

 

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