Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Organic Farming

Radhasoami Dayalbagh Satsang – A Global Model of Selfless Service and Sustainable Living

राधास्वामी दयालबाग सतसंग एवं इसकी सेवा-परंपरा | एक वैश्विक मानवीय दृष्टि  “यह लेख राधास्वामी दयालबाग सतसंग की सेवा-परंपरा को समझने का एक विनम्र प्रयास है…” राधास्वामी मत की एक प्रमुख शाखा, राधास्वामी दयालबाग  सतसंग , आगरा (उत्तर प्रदेश, भारत) स्थित दयालबाग से संचालित एक आध्यात्मिक एवं सेवा-आधारित संगठन है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि “सेवा, सादगी और प्राणी मात्र के कल्याण ” पर आधारित एक जीवन-दर्शन है, जिसमें आध्यात्मिक साधना और व्यवहारिक सेवा का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। इसकी प्रेरणा भारत के साथ-साथ कुछ अन्य देशों तक पहुँची है, जहाँ इसके अनुयायी  सतसंग  और सेवा के कार्यों में संलग्न रहते हैं। दयालबाग का मूल दर्शन दयालबाग  सतसंग  के प्रमुख सिद्धांत निम्न हैं— आत्मिक उन्नति के साथ निःस्वार्थ सेवा श्रम (Labour) को साधना का स्वरूप देना शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के माध्यम से प्राणी मात्र के कल्याण सादगीपूर्ण जीवन एवं उच्च नैतिक मूल्यों का पालन यहाँ यह मान्यता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि सेवा और सदाचार...

राधास्वामी सतसंग दयालबाग में कृषि सेवा का महापर्व

कृषि सेवा का पावन स्वरूप राधास्वामी सतसंग दयालबाग में कृषि कार्य एक पावन सेवा के रूप में प्रतिदिन सैकड़ों सेवकों द्वारा समर्पण भाव से किया जाता है। दयालबाग की आत्मनिर्भर जीवन शैली में जैविक कृषि और डेयरी को विशेष महत्व प्राप्त है। फसलों की कटाई एक महोत्सव यहाँ रबी और खरीफ की फसलों को एक त्यौहार के रूप में सामूहिक सहभागिता के साथ मनाया जाता है। विशेष रूप से गेहूं एवं धान की कटाई एक भव्य महोत्सव का रूप ले लेती है, जिसमें आठ से दस हजार अनुयायी उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। इस दौरान आधुनिक हार्वेस्टर का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि सेवक अपने हाथों से फसल की कटाई कर सेवा, श्रम और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। सेवा में समानता का भाव यहाँ न कोई ऊँच-नीच का भेद है, न पद-प्रतिष्ठा का अंतर-चाहे उद्योगपति हों, आईएएस अधिकारी, सीईओ या साधारण जन, सभी एक समान भाव से खेतों में कंधे से कंधा मिलाकर कृषि सेवा करते हैं, जहाँ मानवता और समर्पण ही सबसे बड़ा परिचय बन जाता है। विभिन्न राज्यों से सहभागिता इसी पावन सेवा में सहभागिता हेतु आज राजाबरारी और मोगराधाना से 115 राधास्वामी सतसंग के अनुया...