खुद से साक्षात्कार ज़िंदगी में ऐसा समय आता है जब हर कोई आपसे परेशान लगता है — कोई आपके दुख से, कोई आपकी खुशी से, कोई आपके हर कदम या फैसले से। मैं बस चाहता था कि कोई मेरी बात सुने। मुझे समझे । धीरे-धीरे, मैं खुद से भी परेशान हो गया। अपने विचारों, डर और बेचैनी में खो गया, और महसूस किया कि जो शांति मैं बाहर ढूँढ रहा था, वह केवल अंदर ही मिल सकती है । दुनिया में खो गया, खुद में खो गया… और फिर मैंने पाई अजेय शांति। फिर वह स्पष्टता का पल आया — जब मैंने खुद को पूरी तरह स्वीकार किया, बिना किसी बहाने या उम्मीद के। तभी मैंने पाया अटूट, पूरी तरह मेरी अपनी शांति । सच्ची ताकत किसी को खुश करने या अपेक्षाओं को पूरा करने में नहीं है। सच्ची ताकत आती है अपने सत्य से जुड़कर और अपने भीतर की आवाज़ सुनकर । “लोग परेशान होते रहेंगे, दुनिया अपनी राह चलेगी, लेकिन जब आप खुद से शांत हो जाते हैं, तब कोई ताकत आपको हिला नहीं सकती।” A Meeting with Myself There comes a time in life when everyone seems troubled by you — by your sorrows, your joys, your actions. I only wished to be heard . To...
Fatherhood of God & Brotherhood of Man.