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Showing posts with the label परम दयाल की शरण

जब जीवन के सभी सहारे टूट जाएँ, तब एक ही सत्य रह जाता है — रा धा/ध: स्व आ मी दयाल की दया व मेहर। 🙏

अब तो बस रा धा/ध: स्व आ मी दयाल, दूसरा न कोई 🙏 जीवन के रास्तों पर चलते-चलते जब सब सहारे बदल जाते हैं, जब अपने और पराये का भेद मिट सा जाता है, तब भीतर एक ही पुकार रह जाती है— अब तो बस  रा धा/ध: स्व आ मी  दयाल, दूसरा न कोई। यह केवल शब्द नहीं, यह उस आत्मा की पुकार है जो संसार की भीड़ से थक चुकी है, और अब केवल उस परम दयाल की शरण चाहती है जो बिना शर्त प्रेम करता है, बिना भेद के संभालता है। कभी लगता है कि सब कुछ हमारा है, पर समय सिखा देता है कि वास्तव में अपना कोई नहीं, सिर्फ एक सत्य स्थायी है— रा धा/ध: स्व आ मी  दयाल की कृपा। जब मन अशांत होता है, जब जीवन प्रश्नों से भर जाता है, तब भीतर से एक ही आवाज उठती है— अब तो बस वही हैं…  रा धा/ध: स्व आ मी  दयाल, दूसरा न कोई। निष्कर्ष: यह भाव हमें संसार से दूर नहीं करता, बल्कि भीतर की शांति से जोड़ता है, जहाँ केवल एक ही सहारा रह जाता है— प्रेम, कृपा और परम दाता दयाल की उपस्थिति।  🙏  रा धा/ध: स्व आ मी  दयाल सब पर दया व मेहर करें  A K Mehta  Explore more below 👇  https://anan...