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The True Essence of Peace… A Journey to Rajaborari

True Essence of Peace… A Journey to Rajaborari  When I visited the remote forest villages of the Rajaborari region in Madhya Pradesh—such as Temrubahar, Mogradhana, Gulardhana, Marapadol, Buddhudhana,Mohagaon and Salai —I didn’t just see life… I felt it. There were no modern luxuries, no digital distractions, no proper public transport… Homes lacked even basic amenities like refrigerators, coolers, and televisions—things that are taken for granted in cities. Yet… something beautiful existed there—something cities often miss— Peace on every face, calm in every heart, and a gentle stillness in every moment. No rush, no endless race to be ahead, no pressure of constant urgency… Just a simple, grounded, and balanced life. In cities today, people have everything, yet feel empty and restless inside, while in villages, with so little, people feel complete and truly alive. Maybe the truth is simple— Comfort comes from things, but peace comes from within. ✨ - A K Mehta...

राजाबरारी: सेवा, समर्पण और प्रेरणा का आदर्श — सम्माननीय कार्यकर्ता सदस्यगण

सम्माननीय कार्यकर्ता सदस्यगण, राजाबरारी: सेवा और प्रेरणा का आदर्श इधर पिछले वर्ष से मुझे कई बार राजाबरारी जाने का तथा वहाँ की सेवाओं में सहयोग करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हर बार वहाँ जाकर जो अनुभव मिला, वह मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक और हृदय को गहराई से स्पर्श करने वाला रहा। दयालबाग के राजाबरारी क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता सदस्यों का समर्पण, अनुशासन और विशेष रूप से उनकी अत्यंत विनम्र एवं निस्वार्थ सेवा ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। वहाँ की सेवाओं को निकट से देखकर यह अनुभव हुआ कि यह केवल कार्य नहीं, बल्कि सच्चे अर्थों में सेवा, साधना और समर्पण की एक सजीव अभिव्यक्ति है। प्रातःकाल के समय भाईयों और बहनों को पूर्ण अनुशासन और निष्ठा के साथ खेतों में सेवा करते देखना वास्तव में अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव है। इतनी सुबह, शांत और समर्पित भाव से सेवा में लगे रहना निस्वार्थ सेवा का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसी प्रकार, दयालबाग राजाबरारी के विस्तृत जंगल क्षेत्र की देखरेख और संरक्षण का कार्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण सेवा के रूप में किया जा रहा है। प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति यह...

राधास्वामी सतसंग दयालबाग की एक दिवसीय औद्योगिक प्रदर्शनी – राजाबरारी, Harda

राधास्वामी सतसंग दयालबाग की एक दिवसीय औद्योगिक प्रदर्शनी – राजाबरारी, Harda आज हरदा में राजाबरारी ईस्टेट ब्रांच द्वारा एक दिवसीय औद्योगिक प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर दयालबाग के सरल जीवन, स्वावलंबन और “नो प्रॉफिट–नो लॉस” सिद्धांत पर आधारित उत्पादों को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रातः 11 बजे कलेक्टर महोदय ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और सभी स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए इस सेवा-कार्य की सराहना की। राजाबरारी और टिमरनी के युवा भाई-बहनों ने अनुशासन, उत्साह और विनम्रता के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। इस प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण राजाबरारी द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों की चित्रात्मक प्रस्तुति रही, जिसने आगंतुकों को वहाँ हो रहे सेवा-कार्य, उत्पादन और सामाजिक प्रयासों से परिचित कराया। प्रदर्शनी में सर्वसाधारण के दैनिक उपयोग की वस्तुएँ भी प्रदर्शित की गईं, जैसे – डबल और सिंगल बेडशीट, तौलिया, गमछा, आयुर्वेदिक औषधियाँ, तेल, साबुन, हैंडलूम सूती कपड़ा, मच्छरदानी, ऊनी शॉल व खेस, बैग, गंजी, गर्म इनर, लोअर आदि। विशेष रूप से शुद्ध मसाले भी प्रदर्शित किए गए, ज...

गाँव की सुबह, मन की मुस्कान

  गाँव की सुबह, मन की मुस्कान  आज सुबह गाँव वैसा ही था, जैसा हर दिन होता है। फिर भी पता नहीं क्यों मन कुछ ज़्यादा ही शांत था। आसमान हल्का-सा सुनहरा हो रहा था। सूरज धीरे-धीरे ऊपर आ रहा था, जैसे उसे भी कोई जल्दी न हो। पगडंडी पर चलते हुए मैंने महसूस किया — यह रास्ता कहीं बाहर नहीं, अंदर तक जाता है। ओस से भीगी घास पर जब कदम पड़े, तो लगा जैसे धरती ने चुपचाप स्वागत किया हो। दूर से आती बच्चों की हँसी हवा में घुल रही थी। उनकी मुस्कान में कोई चिंता नहीं थी, कोई तुलना नहीं थी। लोग अपने काम में लगे थे, बिना शोर, बिना दिखावे। हर चेहरा साधारण था, पर संतुष्ट। तभी समझ आया — खुशी बड़ी घटनाओं में नहीं, इन छोटे पलों में छिपी रहती है। गाँव कुछ कहता नहीं, पर बहुत कुछ जगा देता है। यह सिखाता नहीं, पर सोच बदल देता है। जब लौटकर घर आया, तो सब पहले जैसा ही था — बस मन अलग था। हल्का… स्पष्ट… और मुस्कुराता हुआ। शायद यही गाँव की सुबह का असर है — जो बिना बोले भीतर एक नई रोशनी जगा देती है। — Anand Kishor Mehta 🌿

राजाबरारी गांव के बच्चों की खेल मस्ती और दयालबाग संस्कार

राजाबरारी के बच्चों: खेल, शिक्षा और संस्कार 🌿⚽ 📚 राजाबरारी गांव की शांत गलियों में बच्चों की हँसी और खेल की मस्ती जीवन की सरलता और मासूमियत का आइना हैं। हर दौड़, हर किक, हर मुस्कान हमें याद दिलाती है कि सच्ची खुशी हमेशा बड़े अनुभवों में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे, सहज पलों में मिलती है। ये बच्चे सिर्फ खेल में ही नहीं, बल्कि अपने अध्ययन में भी पूरी लगन और अनुशासन के साथ जुटे हैं। दयालबाग के संस्कारों के साथ, दयालबाग राजाबरारी स्कूल में उनकी पढ़ाई उनके चरित्र और मूल्यों को भी मजबूत बना रही है। खेल, शिक्षा और संस्कार का यह संतुलन उन्हें जागरूक, सशक्त और संतुलित व्यक्तित्व देने में मदद करता है। राजाबरारी के ये बच्चे हमें यह सिखाते हैं कि जीवन की असली सफलता और खुशी ज्ञान, मस्ती और संस्कारों के संगम में है। 🌿✨ खेल, हँसी और संस्कार — यही है राजाबरारी के बच्चों की असली पहचान। आनन्द किशोर मेहता