Skip to main content

राजाबोरारी से भारत मंडपम तक: DEI का समावेशी विकास मॉडल 🇮🇳

 भारत मंडपम में DEI का प्रेरणादायक प्रदर्शन 🇮🇳 





मैंने Dayalbagh Educational Institute (DEI) का वह मॉडल देखा, जो सिर्फ “development talk” नहीं है—बल्कि ground reality में हो रहा real transformation है।

भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “Transforming Tribal India through Technology and Science” में DEI ने जो प्रस्तुत किया, वह वास्तव में ध्यान खींचने वाला था।

DST (Government of India) समर्थित इस पहल के तहत मध्य प्रदेश के राजाबोरारी क्षेत्र में एक ऐसा integrated model विकसित किया गया है, जो कई स्तरों पर बदलाव ला रहा है:

✔️ Education & Skill Development for empowerment
✔️ Rural entrepreneurship + SHG-based livelihood
✔️ Digital inclusion to bridge the gap
✔️ Agriculture & dairy value-chain development

यह मॉडल सिर्फ theory नहीं है, बल्कि live, working and scalable model है, जिसे policymakers और experts से भी सराहना मिली है।

इस journey में Dr. Sumir Devaguptapu Rao जैसे समर्पित नेतृत्व का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। 👏

✨ Real change doesn’t happen in presentations… it happens in villages, in people’s lives.

🔗 Source:

https://www.linkedin.com/posts/dayalbagh-educationalinstitute_dayalbagheducationalinstitute-bharatmandapam-activity-7450170706975195136-i8Tz?utm_source=social_share_send&utm_medium=android_app&rcm=ACoAAFmIWacB_Es31pmv1gi-ChMG_SeLqswtmFo&utm_campaign=copy_link

















Comments

Popular posts from this blog

Rajabarari Hindi Poetry Blog | Nature, Seva & Inspirational Thoughts

एक सोच  जीवन एक बहती धारा है, हर पल नया इशारा है। गिरकर जो फिर संभल जाए, वही सच्चा सितारा है। धूप मिले तो मत इतराना, छाँव मिले तो मत घबराना। मुश्किल राहें रोक न पाएँ, हौसलों को बस जगाना। सपनों को सच करना सीखो, मेहनत से नाता रखना। अपने कर्मों से दुनिया में, खुद की पहचान बनाना। ✍️ — 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 एहसास की कीमत  अल्फाज़ तभी असर दिखाते हैं, जब दिल से निकलकर आते हैं। सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, इनमें जज़्बात भी समाते हैं। सच्चाई की खुशबू हो जिनमें, वो हर दिल को छू जाते हैं। झूठी बातें पलभर चमकें, सच्चे लफ़्ज़ अमर हो जाते हैं। ✍️ — 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 राजाबरारी की अमृत बेला  रात की चादर ओढ़े पर्वत, जब निद्रा में खो जाते हैं। तब राजाबरारी की वादियों में, भक्ति के दीप जल जाते हैं। 🙏 भोर तीन बजे से सजती है, सूरज की पहली आभा तक। सेवा, सिमरन और मौन यहाँ, रूह को ले जाए दाता तक।  न कोई शोर, न कोई हलचल, बस नाम की अमृत धार बहे। इन ठंडी-ठंडी पवन कोंपलों में, मालिक का ही वास रहे।  जब प्रथम किरण नभ को छूती, रूह अंतर्मन से मुस्काती है। राजाबरारी की यह भोर-सेवा, जीवन में उजाला कर जा...