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Running After Success or Happiness? A Deep Reality Check on Life & Joy


Most people run after success…

but forget how to run with happiness.

Today I saw a video of kids running like crazy—
laughing without reason, falling, getting up, and running again.

No goals.
No pressure.
No fear of judgment.

Just pure joy.

And it made me realize something—
We grew up learning everything… except how to be happy without a reason.

We chase achievements, titles, and a “perfect” life…
but lose the freedom to simply live.

Those kids weren’t running to reach somewhere—
they were running because they were alive.

Maybe success isn’t wrong…
but forgetting joy is.

So ask yourself—
Are you running for success… or for happiness?

— Anand Kishor Mehta


ज़्यादातर लोग सफलता के पीछे भागते हैं…
लेकिन खुश होकर दौड़ना भूल जाते हैं।

आज मैंने कुछ बच्चों का एक वीडियो देखा—
बिना वजह हँसते हुए, गिरते… फिर उठते… और फिर दौड़ पड़ते।

ना कोई लक्ष्य।
ना कोई दबाव।
ना कोई डर।

बस खालिस खुशी।

और तभी समझ आया—
हम बड़े होते-होते सब कुछ सीख लेते हैं…
पर बिना वजह खुश रहना भूल जाते हैं।

हम उपलब्धियों, नाम और “परफेक्ट” ज़िंदगी के पीछे भागते हैं…
और बस “जीना” कहीं पीछे छूट जाता है।

वो बच्चे कहीं पहुँचने के लिए नहीं दौड़ रहे थे—
वो दौड़ रहे थे क्योंकि वो ज़िंदा थे।

शायद सफलता गलत नहीं है…
लेकिन खुशी को भूल जाना ज़रूर है।

तो खुद से पूछिए—
क्या आप सफलता के लिए दौड़ रहे हैं…
या खुशी के लिए?

— Anand Kishor Mehta

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