हम सब भाग रहे हैं।
किसी goal के पीछे, किसी position के पीछे, किसी ऐसे “next milestone” के पीछे जो हमें लगता है कि हमें finally satisfaction देगा।
लेकिन एक honest सवाल—
जिसके पीछे आप भाग रहे हैं… अगर वो मिल गया, तो क्या करेंगे?
कुछ समय के लिए खुशी होगी।
फिर? एक नया target। एक नई दौड़।
और एक और गहरा सवाल—
जिसे आप “सुकून” कहते हैं… अगर उससे भी सुकून न मिला, तो?
क्योंकि सच्चाई ये है:
सुकून किसी achievement में नहीं होता।
वो एक internal state है।
अगर अंदर clarity नहीं है, तो external success भी noisy लगेगा।
अगर अंदर stability है, तो imperfect journey भी fulfilling लगेगी।
Career बनाना ज़रूरी है। Growth भी।
लेकिन बीच-बीच में खुद से ये पूछना और भी ज़रूरी है—
👉 क्या मैं इस दौड़ को consciously चुन रहा हूँ, या बस भाग रहा हूँ?
👉 क्या मैं उस life की तरफ जा रहा हूँ जो मुझे सच में चाहिए, या जो दिखती अच्छी है?
Pause लेना weakness नहीं है।
वो awareness है।
क्योंकि कभी-कभी,
जो हम ढूंढ रहे होते हैं…
वो next milestone में नहीं, mindset में मिलता है।
- A K Mehta

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