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कविता From Struggle to Self-Mastery | Inspirational & Spiritual Hindi Poetry by A K Mehta



अब समय तुम्हारा है…

जब भीतर कोई आवाज़ उठे—
“अब समय तुम्हारा है,”
तो कदमों को मत बाँधो तुम,
बस आगे बढ़ते जाना है।

राहें होंगी टेढ़ी-मेढ़ी,
धूप भी सिर पर आएगी,
पर चलते रहने वालों को ही
मंज़िल गले लगाएगी।

धीरे चलो तो भी क्या ग़म,
बस रुकना तुम्हारा काम नहीं,
थक जाओ तो ठहर जाना,
पर हार मानना नाम नहीं।

कभी गिरोगे, कभी सँभलोगे,
यही सफर की कहानी है,
जो हर हाल में आगे बढ़े,
वही असली वीर निशानी है।

तो जब भी दिल ये कहे तुमसे—
“अब वक़्त बदलने वाला है,”
तो डर को पीछे छोड़ के बस
अपने रास्ते चलना है।

— Anand Kishor Mehta



अंतर्यामी का स्पर्श

जब मन की तरंगें शांत हो जाती हैं,
और विचार भी थककर ठहर जाते हैं,
तब एक सूक्ष्म सी उपस्थिति
अंतर में धीरे-धीरे प्रकट होती है।

वो शब्दों से परे है,
पर हर शब्द उसी से जन्म लेता है।
वो रूप से परे है,
पर हर रूप में वही बसता है।

मेरी हर अनकही प्रार्थना
उस तक बिना मार्ग के पहुँच जाती है,
क्योंकि वो कहीं बाहर नहीं—
मेरे ही अस्तित्व में विराजमान है।

जब अहंकार मिटने लगता है,
और “मैं” का बंधन ढलने लगता है,
तब उसी के प्रकाश में
सत्य का द्वार खुलने लगता है।

वो न दूरी में है, न पास में,
न खोज में है, न प्रयास में—
वो तो बस है…
हर श्वास में, हर निवास में।

उसकी कृपा कोई घटना नहीं,
एक निरंतर बहने वाली धारा है,
जो हर जीव, हर क्षण, हर दिशा में
अदृश्य होकर भी सहारा है।

जब साधक भीतर उतरता है,
और स्वयं को समर्पित कर देता है,
तब वही परम सत्य बनकर
अपने अस्तित्व का बोध कराता है।

मैं नहीं… वही है—
यही अंत है, यही आरंभ है।

A K Mehta

स्वयं पर विजय: असली वीर की पहचान

खुद से जो हर दिन लड़ता है,
वही असली वीर कहलाता है।

भीतर के डर को हराकर जो,
सपनों तक कदम बढ़ाता है।

आलस्य की जंजीरें तोड़,
अनुशासन को अपनाता है।

आत्म-संदेह के अंधेरों में,
विश्वास का दीप जलाता है।

गिरकर फिर जो उठ जाता है,
वही जीवन को सजाता है।

दुनिया से बड़ी जीत वही,
जो खुद पर विजय पाता है।

— A K Mehta

छूना है तो...

छूना है तो पहले,
खुद को छू कर आओ,
मन के दर्पण पर जमी
स्वार्थ की धूल हटाओ।

मीठे शब्दों के फूलों से
रूह नहीं महकती,
झूठी प्रशंसा की राहों से
सच्चाई नहीं बहकती।

मैं कोई द्वार नहीं
जो चापलूसी से खुल जाऊँ,
मैं वो एहसास हूँ
जो केवल सत्य से मिल पाऊँ।

अपने भीतर उतरकर देखो,
क्या मन निर्मल है तुम्हारा?
क्या भावों में निःस्वार्थता है,
क्या प्रेम है सचमुच प्यारा?

यदि हाँ—
तो फिर शब्दों की ज़रूरत क्या,
मौन ही परिचय देगा,
तुम्हारी सच्ची दृष्टि ही
दिल तक मार्ग लेगा।

मैं वहाँ नहीं
जहाँ दिखावे का शोर है,
मैं वहाँ हूँ
जहाँ आत्मा का मौन गहन और भोर है।

तो आना—
पर पहले स्वयं को पहचान कर आना,
यदि मुझे सच में छूना है,
तो सत्य का स्पर्श साथ लाना।

— A K Mehta

बस ऐसे ही…

किसे समझाऊँ अब,
और कौन समझेगा भी…
जितना खुद को सही बताने की कोशिश की,
लोग उतना ही गलत समझते गए।

अब तो बस ख़ामोशी अच्छी लगती है,
कम से कम वहाँ कोई सवाल नहीं करता।

ज़िंदगी भी धीरे-धीरे सब सिखा देती है…
कौन अपना है,
और कौन सिर्फ़ बातों में साथ होता है।

कुछ लोग आज भी दिल में हैं,
चाहे अब साथ नहीं हैं…
और शायद कुछ यादें
कभी खत्म नहीं होतीं।

अब किस्मत से लड़ना छोड़ दिया है,
जो हो रहा है उसे होने देते हैं…
क्योंकि आख़िर
हमने यहाँ कौन सा हमेशा रह जाना है।

— A K Mehta

अपनी पहचान स्वयं गढ़ो

खुद को इतना सक्षम कर लो,
कि तूफ़ान भी थम जाएँ।
हौसलों की ऊँची उड़ान से,
असंभव सपने भी सच हो जाएँ।

भीड़ के पीछे चलने से बेहतर,
अपना अलग मुकाम बनाओ।
दुनिया की परछाई छोड़कर,
खुद अपनी पहचान बनाओ।

गिरकर उठना, उठकर बढ़ना,
यही वीरों की निशानी है।
जो खुद पर अटल विश्वास रखे,
वही सबसे बड़ी कहानी है।

संघर्षों में जो निखर सके,
वही असली सोना होता है।
अपनी मेहनत से जो चमके,
वही जग में अनमोल होता है।

~ A.K. Mehta

रा धा/ध: स्व आ मी 🙏

जब जीवन की डोर उलझ जाती,
हर दिशा धुंधली नज़र आती,
जब थककर मन चुप हो जाता,
तब तेरा नाम सहारा बन जाता।

ना कोई चिंता, ना कोई डर,
जब तू है मेरे साथ हर पहर,
तेरी इच्छा में जो मन रम जाए,
वही सच्चा सुख इस जग में पाए।

दुनिया के सुख सब क्षणिक लगते,
तेरे चरणों में पल अनमोल लगते,
जहाँ समर्पण की धारा बहती,
वहीं रूह को शांति मिलती।

छोड़ दिया जब सब तुझ पर मैंने,
हल्के हो गए जीवन के सपने,
अब हर सांस यही कहती है —
तू ही मेरा आरंभ, तू ही अंत है।

जीवन का सबसे बड़ा सुकून यही,
जब हर कर्म का मालिक तू ही।

~ A K Mehta 

सवालों के उस पार

कब, कैसे, कौन, क्या—
इन प्रश्नों में जीवन बीत गया,
उत्तर खोजते-खोजते इंसान
खुद से ही अनजान हो गया।

हर मोड़ पर समय ने
एक नया चेहरा दिखलाया,
जो शब्द कभी कह न सके,
उसे खामोशी ने समझाया।

कुछ सत्य धूप में छिपे रहे,
कुछ रहस्य अंधेरों में पले,
जो टूटकर बिखरा भीतर,
वही आत्मा के दीप बने।

दर्द ने गहराई दी,
वक़्त ने दृष्टि का सार दिया,
जो छिन गया हाथों से,
उसने ही जीने का आधार दिया।

अब जाना—
हर उत्तर मिल जाना आवश्यक नहीं,
कुछ प्रश्न स्वयं ही मिट जाते हैं
जब आत्मबोध जाग उठे कहीं।

सवालों के उस पार
एक गहरा सुकून मिला,
जहाँ स्वयं को जान लिया,
वहीं हर उत्तर मिला।

— A K Mehta

जो कह न सके

कुछ बातें
दिल में जन्म लेती हैं,
पर लबों तक आते-आते
खामोश हो जाती हैं।

इंसान बोलना तो चाहता है,
अपने दर्द, अपने सच,
अपने जज़्बात सब कहना चाहता है…
मगर फिर
डर उसके शब्दों को रोक लेता है।

डर —
कहीं कोई गलत न समझ ले,
कहीं अपने दूर न हो जाएँ,
कहीं दिल की सच्चाई
मज़ाक न बन जाए।

फिर वो इंसान
अपनी ही भावनाओं को
दिल के किसी कोने में दफ़ना देता है,
और ऊपर से
सिर्फ मुस्कुरा देता है।

मगर उसकी खामोशी
बेवजह नहीं होती…
वो भीतर चल रहे
हज़ार तूफानों की कहानी होती है।

याद रखना,
हर वो शख्स जो चुप है,
जरूरी नहीं कि उसके पास
कहने को कुछ नहीं…

हो सकता है
उसके पास इतना कुछ हो
कि शब्द ही कम पड़ जाएँ।

— A K Mehta

भीतर का सुकून 

कुछ नहीं चाहिए अब ज़्यादा,
बस भीतर एक सुकून रहे…

हर रिश्ते में सच्चाई हो,
हर दिल में इंसानियत रहे…

जो बीत गया, उसे जाने दो,
जो है उसी में अर्थ खोजो…

हर पल को अवसर समझकर,
हल्के मन से जीना सीखो…

दुनिया की दौड़ बहुत बड़ी है,
पर अपनी राह अलग रखो…

जहाँ मन मुस्कुरा सके हर रोज़,
वही अपना घर समझो…

किसी के आँसू समझ सको,
किसी की ख़ामोशी पढ़ सको…

यही सबसे बड़ी उपलब्धि है,
कि तुम दिल से जुड़ सको…

समय सिखाता है धीरे-धीरे,
हर घाव भी भर जाता है…

जो बिना कहे भी सब समझ ले,
वही असल इंसान कहलाता है…

शांति वही है, जो भीतर से आए…

— A K Mehta

जीवन के अनेक रंग

कहीं धूप है, कहीं बरसात,
कहीं सवेरा, कहीं शांत रात।
रूप बदलता यह सारा जग,
पर सृष्टि की एक ही बात।

भाषाएँ अलग, चेहरे नए,
राहें सबकी भिन्न सही,
फिर भी हर दिल की गहराई में
एक सी धड़कन बसती वही।

कहीं संघर्ष, कहीं विश्राम,
कहीं भीड़, कहीं एकांत,
पर जीवन के हर रूप में
एक ही सत्य, एक ही प्राण।

दुनिया रूप अनेक सजाती,
पर मूल सदा एक ही है—
कहीं बारिश, कहीं धूप,
पर सृष्टि एक ही है।

— A K Mehta

सिर्फ मालिक 

ना दौलत में,
ना शोहरत में सुकून मिला,

जो दिल को थाम ले,
वो बस मालिक में मिला।

दुनिया हर रोज़
नई वजहें देती रही,
कभी हँसी,
कभी सपनों के मेले देती रही।

मगर हर खुशी के बाद
एक खालीपन रह जाता था,
जैसे दिल किसी और चीज़
को पुकारता था।

फिर धीरे-धीरे समझ आया—
रूह का सुकून
किसी चीज़ में नहीं,
किसी “अपने” में होता है।

और उससे अपना
कोई नहीं…
सिवाय मालिक के।

अब ना बहुत पाने की चाह है,
ना कुछ खोने का डर,
ना दुनिया से शिकायतें हैं,
ना वक्त से कोई जंग।

अब तो हर हाल में
एक अजीब सी राहत रहती है,
क्योंकि दिल ने
एक ही सहारा चुन लिया है—

सिर्फ मालिक। 

— A K Mehta 

खामोश सफ़र 

रास्ते अब भी वही हैं,
बस मुसाफ़िर बदल गए।

हम जिनके लिए ठहरे थे,
वो आगे निकल गए।

वक़्त ने इतना सिखा दिया,
कि अब शिकायत नहीं होती।

दिल टूट भी जाए अगर,
फिर भी बगावत नहीं होती।

अब खामोशी में सुकून है,
और तन्हाई अपनी लगती है।

जो बातें कभी चुभती थीं,
अब वो भी अच्छी लगती हैं।

हमने खुद को खोकर ही,
खुद को पाना सीखा है।

इस मतलबी दुनिया में,
अकेले मुस्कुराना सीखा है। 

A k Mehta

वो अंतिम पल 

अब हर पल को
धीरे-धीरे जीता हूँ,
जैसे शाम
सूरज को जीती है।

अब शिकायतें
धूल बन चुकी हैं,
और मन
एक शांत दरिया सा है।

बस एक ही
अंतिम अभिलाषा शेष है—

जब इस जग से
रुख़्सत होने का समय आए,
तो मृत्यु भी
किसी उत्सव सी लगे।

वो पल इतना
निर्मल हो,
इतना प्रेम से भरा,
इतना अद्भुत…

कि साक्षी
मुस्कुराकर निकल जाए,
और शब्द
उसकी सुंदरता के आगे
मौन हो जाएँ।

A K Mehta

मालिक की दया

सफ़र मेरा था,
मगर राहें उसकी थीं…
कदम मेरे चले,
मगर सहारे उसके थे।

मैं क्या था आखिर,
बस एक राज़दार उसका,
वरना इस जगत के
सारे राज़ उसके थे।

धूप में वह खुद ठहरा रहा,
मुझे साया देने के लिए,
जबकि बाग़ों के तमाम
सायादार दरख़्त उसके थे।

दरिया किनारे वह प्यासा दिखा,
सिर्फ़ मेरी प्यास बुझाने को,
जबकि लहरों वाले
सारे समंदर उसके थे।

और जब पहुँचा मैं
इन ऊँचाइयों के शिखर तक,
तब समझ आया मुझे —
यह कमाल मेरा नहीं,
सब करम उसके थे…

— A. K. Mehta

🌿 बोल और बवाल 🌿

झगड़े की आग अक्सर,
शब्दों से ही जलती है।

एक तीखी बोली इंसान के,
मन को भीतर से छलती है।

चेहरे पर मुस्कान रहती है,
पर दिल रोता रहता है।

क्योंकि बोला गया हर शब्द,
रूह में कहीं बसता है।

जहाँ विनम्रता का दीप जले,
वहाँ क्रोध हार जाता है।

और जहाँ अहंकार बोल उठे,
वहाँ अपना भी पराया हो जाता है।

इसलिए बोलो तो ऐसे बोलो,
जिनसे किसी का मन न टूटे।

क्योंकि रिश्ते आवाज़ से नहीं,
भावना से जुड़े होते हैं।

✍️ A K Mehta 🌿

🌿 सतसंग 🌿

सतसंग वह धरा है,
जहाँ प्रेम बिना शर्त बहता है।

जहाँ हर प्राणी —
चाहे मानव हो, पशु हो या पक्षी,
सबको अपनापन मिलता है।

वहाँ टूटे दिलों को सहारा मिलता है,
और भटकी रूहों को किनारा।

सतसंग में शब्द कम,
पर शांति अधिक बोलती है।

वहाँ अहंकार नहीं टिकता,
केवल करुणा जीवित रहती है।

“जिस स्थान पर हर जीव सुरक्षित महसूस करे,
वही सच्चा 
सतसंग है।”

— A K Mehta

  संघर्ष 

रास्ते कठिन थे,
फिर भी कदम रुकने न दिए।
आंधियों ने बहुत रोका,
मगर सपने झुकने न दिए।

हर दर्द ने कुछ सिखाया,
हर ठोकर ने संभाल दिया।
जिसे लोग हार समझ बैठे,
उसी ने मुझे कमाल दिया।

आज जो थककर बैठ गए,
वो मंज़िल क्या पाएंगे…
जो जलते हैं संघर्ष में,
वही इतिहास बनाएंगे। 

A K Mehta

अनुशासन

जब मन कहे —
“आज रहने दो…”
और आत्मा कहे —
“उठो, अभी चलना बाकी है…”

वहीं से शुरू होता है
Discipline।

यह आसान नहीं होता,
हर दिन खुद से लड़ना पड़ता है।
नींद से, बहानों से,
और अपनी कमजोरियों से।

लेकिन जो इंसान
अपने मन के खिलाफ जाकर भी
सही रास्ता चुन लेता है,
वही एक दिन
अपनी किस्मत बदल देता है।

क्योंकि —

“Discipline दर्द देता है,
लेकिन बिना discipline के
ज़िंदगी और ज्यादा दर्द देती है।”

— A K Mehta

“ICU से लौटकर…” 

“ICU की उन ठंडी रातों में
जब मशीनों की आवाज़ ही साथी थी,
हर सांस जैसे पूछती थी —
‘क्या अभी और बाकी है जिंदगी…?’

आंखें खुलती थीं,
पर सपने कहीं खो चुके थे।
दर्द इतना था कि
शब्द भी खामोश हो गए थे।

फिर एक दिन
वक्त ने धीरे से हाथ पकड़ा,
और मुझे उस अंधेरे से
वापस रोशनी में ले आया… ✨

अब जब खुली हवा में सांस लेता हूँ,
तो हर छोटी चीज़ में मालिक दिखते हैं—
किसी की मुस्कान में,
किसी की दुआ में,
किसी अपने की आवाज़ में।

अब शिकायत नहीं करता जिंदगी से,
क्योंकि मौत के करीब जाकर
समझ आया कि
जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं मिलता।

अब दिल से बस यही निकलता है—
जो दर्द मैंने देखा,
वो किसी और की किस्मत न बने… 🤍

और अगर बने भी,
तो उसे भी एक नई सुबह जरूर मिले…”


— A K Mehta

अनकहा दर्द 

कुछ रिश्ते नाम तो रखते हैं,
पर दिल में घर नहीं करते,
न प्यार की रोशनी देते,
न खुलकर दूर ही होते।

जब साथ निभाने की घड़ी आए,
तो कदम अक्सर रुक जाते,
और छोड़ने की बात करो,
तो आँसू सामने आ जाते।

ये कैसा अनकहा दर्द है,
जो चुप्पी में पलता रहता,
न अपना बनकर जीता है,
न जाने का हक़ ही देता।

ऐ दिल, सच पहचान ज़रा —
जहाँ सम्मान और सुकून न हो,
वहाँ ठहरना प्रेम नहीं होता। 

A K Mehta

प्रेम का बुलावा 

धैर्य रखो,
अभी राहों को सँवरने दो,
मन की बंद खिड़कियों में
थोड़ी रोशनी उतरने दो।

मैं बुलाऊँगा तुम्हें एक दिन,
पर उस क्षण
जब तुम स्वयं को जान जाओगे,

जब दुनिया की आवाज़ों से ऊपर उठकर
अपने हृदय का सत्य पहचान जाओगे।

फिर न कोई शिकायत होगी,
न बिछड़ने का भय रहेगा,

मैं प्रेम से
तुम्हें गले लगाऊँगा—
और मौन भी
उस दिन प्रेम कहेगा। 

A K Mehta 


 मेहर की छाँव 

जबसे जुड़ा हूँ तुमसे,
रूह को अपना घर मिल गया,
सूने पड़े इस जीवन में
प्रेम का पावन स्वर मिल गया। 

तेरी यादों की शीतल छाया
मन पर ऐसे उतर गई,
जैसे तपते रेगिस्तान में
सावन की पहली बूँद ठहर गई। 

दुनिया की भीड़ में खोकर
मैं खुद से भी दूर हुआ,
तेरी कृपा ने हाथ पकड़कर
फिर भीतर का नूर छू लिया। 

जो दर्द कभी बोझ लगे थे,
अब वही इबादत बनते हैं,
तेरे प्रेम से जुड़े हुए आँसू भी
मोती जैसे लगते हैं। 

अँधेरों ने लाख कोशिश की,
मन का दीप बुझा देने की,
पर तेरी मेहर की एक किरण ने
हर रात सुबह में बदल दी। 

अब हर साँस तेरी अमानत है,
हर धड़कन तेरा नाम कहे,
सूखे मन के इस मंदिर में
प्रेम का अनंत प्रकाश रहे। 

तेरे संग जुड़कर जाना मैंने—
सच्चा सुख कहीं बाहर नहीं,
जिस हृदय में मालिक बस जाए,
उससे बड़ा कोई मंदिर नहीं… 

— A K Mehta

सफर अभी बाकी है 

बुरे दिनों से डरकर
रास्ते नहीं बदला करते,
क्योंकि तूफ़ानों के बाद ही
आसमान साफ हुआ करते हैं।

हमेशा याद रखना —
हर कठिन पल
तुम्हें गिराने नहीं,
बल्कि और मजबूत बनाने आता है।

जब दुनिया तुम्हारे फैसलों पर
सवाल उठाए,
तब अपने विश्वास को
कमज़ोर मत होने देना।

क्योंकि इंसान की पहचान
उसकी सोच से होती है,
और उसका भविष्य
उसके निर्णयों से बनता है।

सोच बड़ी रखो,
इरादे ऊँचे रखो,
और कदम इतने मजबूत रखो
कि मुश्किलें भी
तुम्हारा रास्ता छोड़ दें।

आज का संघर्ष
कल की सफलता बनेगा,
और एक दिन
तुम्हारी मेहनत ही
तुम्हारी सबसे बड़ी पहचान बनेगी।

इसलिए मुस्कुराकर आगे बढ़ो…
क्योंकि —

 Better days are coming… 

A K MEHTA


🌺 मायावती से सत्यवती 🌺

दयालबाग के घर-आँगन में देखो आई बहार,
मायावती बरसा रही सब पर जल की फुहार।

विशाल तन, भोला मन, मनोहर इसका रूप,
मालिक की असीम कृपा से जगमग इसका स्वरूप।

जयपुर से दयालबाग आई, मालिक का मिला दुलार,
मेहर की शीतल छाँव मिली, बरसी दया अपार।

हर पल इसकी छवि में झलके प्रेम और विश्वास,
मालिक की करुणा से महके जीवन का उल्लास।

मायावती से सत्यवती बनी, पाई नई पहचान,
मालिक की असीम मेहर का करती जग में गान।

नाम नया, सम्मान नया, पाया नया आधार,
सत्य की ज्योति से दमका इसका जीवन-संसार।

दया-दृष्टि की छाँव तले खिल उठी हर आस,
मालिक की कृपा से भर गया जीवन में उल्लास।

निज घर जाने की मेहर भी जब मालिक ने दी,
कृतज्ञता की सरिता बन हर धड़कन मुस्काई थी।

मायावती से सत्यवती तक कैसी लीला न्यारी,
मालिक की असीम दया की महिमा सबसे प्यारी।

दयालबाग के घर-आँगन में गूँजे यही पुकार,
सत्यवती पर बरस रही है मालिक की दया अपार।

जल की फुहारों संग-संग यह संदेश सुनाती,
मालिक की असीम मेहर से भाग्य भी खिल जाता।

सत्यवती की कथा कहे बस एक ही सार—
मालिक की मेहर से हो जाता बेड़ा पार।

🙏🌺✨ A K Mehta ✨🌺🙏

नफ़रत के उस पार

अगर मुझसे सारी दुनिया नफ़रत कर ले,
तो भी मन उदास न होगा;
जो तेरा हो जाए, मालिक—
वह कभी निराश न होगा।

दुनिया की बातें धूल समान,
आज उठें, कल खो जाएँ;
तेरी मेहर की एक किरण से,
सूने दिल भी जगमगाएँ।

किसे दोष दें, किससे लड़ें—
सब अपनी नज़र के कैदी हैं;
कोई फूल समझकर अपनाता,
कोई काँटे कह देता है।

हमने तो बस इतना सीखा—
जो मिला, उसे प्रसाद माना;
जो छूट गया, उसे तेरी
मौन शिक्षा का वरदान जाना।

न कोई गिला, न कोई प्रश्न,
न भाग्य से कोई लाचारी;
जो कुछ मिला, तेरी रज़ा समझा—
यही रही समझ हमारी।

दुनिया चाहे अपनाए या ठुकराए,
न बदले यह श्रद्धा हमारी;
हाथ जुड़े, सिर झुका रहे—
अर्जी हमारी,
मर्जी तुम्हारी।

A K Mehta

False Pride

न पहचान, न समझ —
फिर अहंकार किस बात का?
धुंध में खड़ा इंसान,
सच से अनजान हालात का।

जो खुद को ही सब कुछ समझ ले,
वो अक्सर राह भटक जाता है,
आईने से दूर रहकर
खुद से ही धोखा खाता है।

समझ की नींव पर ही
असली व्यक्तित्व टिकता है,
वरना अहंकार का दीपक भी
हल्की हवा में झुकता है।

जो जान ले अपनी सीमा,
वही ऊँचाइयाँ छू पाता है,
बिना समझ के हर विचार
बस शोर बन जाता है।

विनम्रता ज्ञान की पहचान है,
अहंकार अज्ञान का पर्दा;
जो स्वयं को जान गया,
उसने जीवन का सत्य पढ़ा।

False Pride destroys silent wisdom.

— A K Mehta ✍️

 समझ का सवेरा 

जब तक दोष दूसरों में था,
मन अंधेरों में था।

जिस दिन खुद को देखा,
रास्ता बदल गया।

अपनी भूल समझी,
अहंकार पिघल गया।

सत्य को अपनाया,
मन हल्का हो गया।

गलतियाँ छिपाने से नहीं,
स्वीकारने से सीख मिलती है।

जो खुद को सुधार ले,
वही आगे बढ़ता है।

हर ठोकर ने सिखाया,
हर अनुभव ने संवारा।

अब शिकायत नहीं,
बस समझ का सहारा।

जिस दिन स्वयं को जाना,
उसी दिन नया सवेरा हुआ।

"अपनी गलती का एहसास,
जीवन की सबसे बड़ी समझ है।"

A K Mehta 

कारवाँ से परे

मैं चला था एक राह पर,
कुछ सपनों को साथ लिए।
दिल में विश्वास की ज्योति,
और आँखों में प्रभात लिए।

रास्ते में कारवाँ मिला,
कई चेहरे, कई आवाज़ें।
कुछ ने हौसला बन साथ दिया,
कुछ ने बाँटी अपनी परछाइयाँ।

कुछ दूर तक सब साथ चले,
मानो सफ़र ही मंज़िल हो।
हर कदम पर उत्साह था,
मानो जीवन ही महफ़िल हो।

फिर समय ने करवट बदली,
रास्तों ने रूप बदल लिया।
कुछ लोग अपनी दिशा चले गए,
कुछ ने नया आसमान चुन लिया।

मैंने किसी को रोका नहीं,
न किसी से कोई प्रश्न किया।
हर यात्री का अपना पथ है,
मैंने इस सत्य को स्वीकार किया।

जब कारवाँ पीछे छूट गया,
तब एक नई बात समझ आई—
भीड़ से नहीं, उद्देश्य से चलने वाले
मुसाफ़िर की पहचान बन पाई।

अब मैं कारवाँ से परे हूँ,
पर अकेला नहीं कहलाता।
मेरे साथ मेरा विश्वास है,
जो हर अँधेरे में दीप जलाता।

मंज़िल अभी भी सामने है,
और सफ़र अभी भी जारी है।
मैं चलता हूँ शांत हृदय से,
क्योंकि यही मेरी तैयारी है।

यदि एक दिन मंज़िल मिल गई,
तो उसे विनम्रता से अपनाऊँगा।
और यदि सफ़र ही पुरस्कार हुआ,
तो मुस्कुराकर उसे निभाऊँगा।

𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️

"कारवाँ साथ हो तो सफ़र सुंदर बनता है,
पर उद्देश्य साथ हो तो सफ़र अमर बन जाता है।"

संघर्षों की गली 🌿

जिस गली से मैं गुज़रा हूँ,
वहाँ मेरे संघर्षों के निशान हैं,
हर मोड़ पर एक परीक्षा थी,
हर कदम पर नए इम्तिहान हैं।

कई लोग इस राह से पहले भी गुज़रे होंगे,
कई लोग मेरे बाद भी जाएँगे,
पर जो दर्द मैंने जिया है,
उसे मेरे सिवा कौन दोहराएगा।

जब हालात मेरे खिलाफ़ खड़े थे,
तब हौसले मेरे साथ खड़े थे,
जब उम्मीदें भी चुप हो गई थीं,
तब सपने मेरे पास खड़े थे।

धूप ने जलाया, आँधियों ने सताया,
वक्त ने हर पल आज़माया,
लेकिन मैंने हार मानना नहीं सीखा,
हर ठोकर को सीढ़ी बनाया।

आज जो मेरी राह कठिन दिखती है,
कल वही मेरी पहचान होगी,
मेरे संघर्षों की यह छोटी-सी कहानी
किसी के लिए नई उड़ान होगी।

मैं मंज़िल का नहीं,
अपने सफ़र का अभिमान रखता हूँ,
क्योंकि जीत तो क्षण भर की होती है,
पर संघर्ष जीवन भर की पहचान बनता है।

— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️ 

अधूरे शौक़

“बाद में खुलकर जी लूंगा…”
बस यही सोचता रहा,
हर नए दिन के साथ
खुद को टालता रहा।

कभी घर की चिंता,
कभी अपनों की आस,
जिम्मेदारियों के नीचे
दबती गई मन की प्यास।

जो गाने कभी दिल गुनगुनाता था,
अब सिर्फ़ खामोशी सुनाता है,
जो सपने आँखों में पलते थे,
वक्त उन्हें चुपके से ले जाता है।

सबको संभालते-संभालते
खुद कहीं पीछे छूट गया,
जीवन कमाया बहुत मगर
जीने का समय ही रूठ गया।

अब समझ आया —
हर खुशी को कल पर मत टालो,
कुछ पल अपने लिए भी जी लो,
वरना उम्र गुजर जाएगी
और मन बस यही कहेगा…

“मैं जीना चाहता था,
पर जिम्मेदारियों में खो गया…”

— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️

“दर्द से नई सुबह”

सब एक साथ आए…
एक तूफ़ान की तरह,
एक-एक करके नहीं।

और मैं—
सिर्फ घायल नहीं था,
मैं बिखर गया था।

शब्द नहीं थे…
पत्थर थे,
जो दिल पर गिरते रहे।

जो कभी अपना था,
वही अजनबी हो गया,
और मैं वहीं खड़ा रहा—
चुप, अकेला, खोया सा।

मैं टूटा…
पर आवाज़ नहीं हुई,
क्योंकि सबसे गहरा दर्द
हमेशा चुप रहता है।

आँखों में समंदर था,
मगर होंठ मुस्कान ओढ़े रहे,
जैसे सब ठीक है…
जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

पर भीतर कहीं,
एक छोटी सी रौशनी बची थी—
जो बार-बार कहती रही:
“अभी खत्म नहीं हुआ…”

क्योंकि हर टूटना,
अंत नहीं होता…
कभी-कभी वही
नई शुरुआत होता है।

अब मैं फिर जुड़ रहा हूँ—
टुकड़ों में सही,
पर पूरे बनने की तरफ।

और याद रखना—
जो टूटकर भी चल पड़े,
वही अपनी दुनिया
खुद बना लेते हैं…

A K Mehta

“सतगुरु की महिमा”

जब कुछ भी अपना नहीं था,
तब भी कोई साथ था…
चुप था, अदृश्य था,
फिर भी हर पल पास था।

ना कोई आवाज़, ना कोई रूप,
फिर भी जीवन संभल गया…
जैसे अंधेरी राहों में
अचानक दीपक जल गया।

मैं समझ नहीं पाया पहले,
ये कौन सा सहारा है…
पर हर गिरते हुए पल में
कोई मुझे उठा रहा है।

ना पूछता है कुछ मुझसे,
ना हिसाब कोई लेता है…
फिर भी मेरे हर दर्द को
अपने में ले लेता है।

जो दुनिया से नहीं मिलता,
वो यहाँ मिल जाता है…
जब नाम लिया जाता है,
हर बोझ हल्का हो जाता है।

ऐसी है कृपा उसकी,
जो शब्दों में ना आएगी…
सतगुरु की महिमा तो बस
जीकर ही समझ आएगी।

मेरे परम प्रिय संत सतगुरु
रा धा स्व आ मी दाता दयाल

A k Mehta 

 विरह की काली रातें 

रातें जब चुप हो जाती हैं,
दिल की धड़कन बोलती है…

जो पास नहीं इस दुनिया में,
उसकी यादें खोलती हैं…

ना नींद मिले, ना सुकून मिले,
बस खामोशी साथ चले…

हर सांस में उसका नाम बसे,
और आँखों में दर्द जले…

वो दूर है फिर भी पास लगे,
हर पल उसका एहसास लगे…

जो बातें कभी कही थीं हमने,
अब वही सबसे खास लगे…

दिल रोए भी तो आवाज़ नहीं,
ये दर्द भी बेआवाज़ सही…

विरह वही जो जिया जाए,
बस कहा न जाए कभी…

🌿 “जिसे दिल ने अपना माना,
वही सबसे बड़ा इम्तिहान है…”

❄️ “जहाँ हिम्मत रास्ता बनाती है”

बर्फीली राहें,
टूटी साँसें,
फिर भी चलना…

डर था बहुत,
पर इरादा बड़ा,
हार को हराना…

हर कदम दर्द,
हर पल जंग,
फिर भी बढ़ जाना…

आसमान दूर सही,
पर हिम्मत पास थी,
और सपने साथ थे…

आख़िर में बस एक सच —
जो रुके नहीं,
वही जीत गए… 🇮🇳

— 𝓐 𝓴 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️

मालिक साथ हैं 🌿

मालिक साथ हैं, यह सोचकर
यदि मन अपनी राह चलने लगे,

मर्यादा की रेखाएँ मिट जाएँ,
और विवेक कहीं खोने लगे।

तो समझो विश्वास नहीं,
अहंकार भीतर जाग रहा है,

भक्ति का दीप बुझाकर,
मन अपना ही राग गा रहा है।

मालिक का होना छूट नहीं,
हर कदम की जिम्मेदारी है,

उनकी कृपा का सच्चा अर्थ,
अपने ऊपर पहरेदारी है।

जो कहे—"वे समझ लेंगे",
और स्वयं को समझना छोड़ दे,

वह धीरे-धीरे अपने ही हाथों,
अपना अस्तित्व तोड़ दे।

सच्ची शरण वही है जिसमें
मन विनम्र और सजग रहे,

मालिक का प्रेम मिले तो भी
अंतर में अनुशासन जगमग रहे।

क्योंकि मालिक का साथ
मनमानी का अधिकार नहीं देता,

वह तो हर पल यह याद दिलाता है—
कि स्वयं को खोना, इश्क़ का सार नहीं होता।

— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️ 

टूटकर भी मजबूत 

“ज़िंदगी ने चोट दी,
पर मेरा हौसला नहीं तोड़ पाई।
आँखों में थोड़ी नमी आई,
मगर उम्मीद फिर भी मुस्कुराई।

कभी बिना वजह भी
दर्द इंसान के हिस्से आ जाता है,
शायद ऊपरवाला उसी को
भीतर से और मजबूत बनाता है।

अब ना किसी से शिकायत होगी,
ना हालातों से हार मानूँगा,
मैं अपने कर्म और अपने धैर्य से
हर अंधेरे को पीछे छोड़ जाऊँगा।

रुकना मेरी आदत नहीं,
झुकना मेरी पहचान नहीं,
मैं टूटकर भी इतना मजबूत बनूँगा
कि वक्त भी मेरी मिसाल देगा यहीं।” ✨

— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️

खुद को बदलो 🔥

तुम्हारे अंदर
एक ऐसा इंसान छुपा है
जो बहुत मजबूत है,
लेकिन कुछ आदतें
उसे बाहर आने नहीं देतीं।

डर कहता है — रुक जाओ,
आलस कहता है — कल कर लेंगे,
और बहाने धीरे-धीरे
सपनों को कमजोर बना देते हैं।

पर सच यह है —
किस्मत बदलने से पहले
इंसान को अपनी आदतें बदलनी पड़ती हैं।

जिस दिन तुम
अपने डर, आलस और बहानों पर जीत हासिल कर लोगे,
उसी दिन तुम्हारी जिंदगी
नई रोशनी से भर जाएगी।

क्योंकि सबसे मजबूत इंसान वही होता है
जो हर दिन
खुद से लड़कर बेहतर बनता है। ✨

— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️


 मौज उनकी 

जो भी निर्धारित है,
सच बनकर रहेगा… 

मालिक की रज़ा से,
हर काम संवर जाएगा…

इंसान चलेगा अपनी सोच के साथ,
पर फैसला वही कर जाएगा… 

मेहनत के दीप जलेंगे,
आशाएँ भी बढ़ेंगी…

पर परिणाम का लेखा-जोखा,
वही तय कर जाएगा…

ना शिकायत रख,
ना हालात से डर… 

हर दर्द भी,
उसकी ही योजना में आएगा…

जहाँ सब्र जवाब देने लगे,
वहीं उसका करम मुस्कुराएगा… ✨

चिंता छोड़ दे,
सब कुछ उसे सौंप दे…

जो होगा,
तेरे हक में ही लिखा जाएगा…

— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️


🌙 खामोश रातें

खामोश रातें
बहुत कुछ कह जाती हैं…

चुप रहकर भी
दिल को पढ़ जाती हैं…

कुछ यादें
धीरे से जगाती हैं…

कुछ दर्द
फिर से रुला जाते हैं…

पर इन्हीं रातों में
समझ आता है…

कि टूटकर भी
इंसान संभल जाता है…

हर अंधेरा
कुछ सिखा जाता है…

और हर दर्द
मजबूत बना जाता है… 

— 𝓐 𝓴 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪

 क्या भूलूँ, क्या याद करूँ 

क्या भूलूँ, क्या याद करूँ,
बीते दिनों का हिसाब करूँ...

कुछ पल थे फूलों की खुशबू जैसे,
कुछ काँटों का एहसास बने।

कुछ लोग मिले दीपक बनकर,
कुछ अँधेरों की रात बने।

कुछ हँसी आज भी गूँजती है,
कुछ आँसू अब भी नम कर जाते हैं।

कुछ सपने मंज़िल तक पहुँचे,
कुछ रास्तों में बिखर जाते हैं।

समय की धारा बहती रही,
हर दृश्य बदलता चला गया।

जो अपना था, वह भी कभी-कभी,
यादों का हिस्सा बन गया।

अब जब पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो मन यही प्रश्न करता है—

क्या भूलूँ उन दर्द भरे लम्हों को,
जिन्होंने जीना सिखाया है?

या याद करूँ उन प्यारे चेहरों को,
जिन्होंने दिल को महकाया है?

शायद न कुछ पूरी तरह भूलना है,
न सब कुछ सँभालकर रखना है।

बस अच्छे पलों को दिल में बसाकर,
बाकी को समय के हवाले करना है।

तभी तो जीवन मुस्कुराकर कहता है—

यादें बोझ नहीं होतीं,
वे सफ़र की सबसे सुंदर पूँजी होती हैं।

𝒜 𝒦 𝑀𝑒𝒽𝓉𝒶 𝓒𝓾𝓻𝓼𝓲𝓿𝓮 

रिश्ता 🌿

रिश्ता खून से नहीं,
धड़कनों के जुड़ने से बनता है।

जहाँ स्वार्थ खत्म हो,
वहीं अपनापन जन्म लेता है।

दूरी चाहे कितनी भी हो,
सच्चे रिश्ते दिलों में बसे रहते हैं।

रिश्ता वह छाँव है,
जहाँ थका हुआ मन सुकून पाता है।

यह कोई सौदा नहीं,
बल्कि निभाने की जिम्मेदारी है।

जो आपकी खुशी में मुस्कुराए,
और दुख में साथ निभाए,
वही अपना है।

रिश्ते शब्दों से नहीं,
व्यवहार से पहचाने जाते हैं।

जहाँ प्रेम के साथ सम्मान हो,
वहीं रिश्ते उम्रभर महकते हैं।

न साथ रहने से रिश्ता बनता है,
न नाम देने से,
रिश्ता तो दिल में बसने से बनता है।

कुछ रिश्ते ईश्वर का उपहार होते हैं,
और कुछ हमारे व्यवहार से बनते हैं।
जो हर हाल में साथ निभ जाए,
वही सच्चा रिश्ता कहलाता है।

𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝒶 ✍️


भीड़ से घबराइए नहीं

भीड़ से घबराइए नहीं,
बस अपने कदमों पर विश्वास रखिए,
हर रास्ता पहले अकेला होता है,
फिर उसी पर कारवाँ चलता है।

भीड़ शोर मचा सकती है,
पर मंज़िल नहीं दिखा सकती,
मंज़िल तो वही पाता है,
जो अपने हौसलों की आवाज़ सुनता है।

जब लोग रुकने को कहें,
तब भी आगे बढ़ते रहिए,
क्योंकि ऊँचे पर्वतों की चोटियों पर
भीड़ नहीं, साहस मिला करता है।

याद रखिए—
पहचान भीड़ में खो जाने से नहीं,
भीड़ से अलग खड़े होने से बनती है।

अपने भीतर के दीप को जलाए रखिए,
विश्वास की लौ को बुझने मत दीजिए,
क्योंकि अंधेरों में वही चमकता है,
जो स्वयं रोशनी बनना जानता है।

भीड़ राहों को भर सकती है,
पर इतिहास वही लिखते हैं,
जो भीड़ से नहीं,
अपने विश्वास से चलते हैं।

— 𝓐 𝓚 𝓜𝓮𝓱𝓽𝓪 ✍️ 🌿✨

जड़ता का बंधन

कुछ लोग समय के साथ,
अपने विचार नहीं बदलते।

पुरानी सोच की दीवारों में,
खुद को ही कैद रखते।

नए अवसर सामने आते,
पर वे कदम नहीं बढ़ाते।

शिकायतों के साये में,
अपने सपने खो जाते।

नदियाँ बहकर आगे बढ़तीं,
मौसम भी रंग बदलते।

पेड़ नए पत्ते धारण करते,
जीवन के स्वर सँवरते।

पर जो जड़ता से बंधे रहें,
वे ठहराव में ही जीते।

जो परिवर्तन को अपनाएँ,
वही जीवन को जीतें।

A K Mehta ✍️

  अच्छे विचार 

अपने मन में दीप जलाओ,
अच्छे विचारों को अपनाओ।

क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष मिटाकर,
प्रेम और दया को घर लाओ।

जैसा सोचोगे, वैसा बनोगे,
जीवन की राह स्वयं चुनोगे।

विचार ही बनते हैं चरित्र,
विचार ही लिखते हैं भाग्य का चित्र।

मन को ज्ञान के फूलों से सजाओ,
मानवता का संदेश फैलाओ।

कल कैसा होगा जीवन तुम्हारा,
यह आज के विचारों ने संवारा।

अपने मन को अच्छे विचारों से भरिए;
क्योंकि वही विचार कल आपके चरित्र और भाग्य का निर्माण करेंगे।

— A K Mehta


 

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