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Gratitude and Service: A Moment of Responsibility and Respect

एक समय था जब मैं लोगों की सोच से खुद को आंकता था… आज मैं अपने काम से खुद को पहचानता हूँ। पहले मैं इस उलझन में रहता था कि लोग मेरे बारे में क्या सोच रहे हैं। हर निर्णय के पीछे एक डर छिपा रहता था—“लोग क्या कहेंगे?” लेकिन समय के साथ समझ आया कि लोगों की सोच स्थिर नहीं होती, वह बदलती रहती है। और अगर मैं उसी के आधार पर खुद को आंकता रहूँ, तो मैं कभी आगे नहीं बढ़ पाऊँगा। अब मैं खुद को लोगों की नजर से नहीं, बल्कि अपने काम की ईमानदारी और अपनी जिम्मेदारी से पहचानता हूँ। क्योंकि धीरे-धीरे यह साफ हो जाता है— दुनिया आपकी बातों से नहीं, आपके काम से आपको जानती है। जब ध्यान बाहर से हटकर अंदर की जिम्मेदारी पर चला जाता है, तो आत्मविश्वास अपने आप मजबूत होने लगता है। ✨ असली पहचान वही है जो आप अपने कर्मों से बनाते हैं, न कि दूसरों की राय से। — A K Mehta There was a time when I used to measure myself through people’s opinions… today I define myself through my work. Earlier, I often lived with the concern of what others might think. Every decision carried an invisible weight— “What will people sa...