Skip to main content

Posts

Showing posts with the label आत्म–खोज

🌲 राजाबरारी के घने जंगल में साहस और विश्वास 🌿

 🌲 जंगल में स्वयं से संवाद 🌿  🌲 राजाबरारी के घने जंगल में साहस और विश्वास 🌿 जंगल की नीरवता में जब मैं अकेला आगे बढ़ रहा था, तब सच कहूँ तो मैं अकेला नहीं था। मेरी साँसें, मेरे विचार, और सबसे बढ़कर — मालिक जी का अटूट साथ हर कदम पर मेरे साथ था। चारों ओर ऊँचे पेड़ प्रहरी बनकर खड़े थे। पत्तों की सरसराहट जैसे कोई गुप्त संदेश सुना रही थी। दूर कहीं पक्षियों की मधुर आवाज़, तो कहीं झाड़ियों में हलचल — यह वही स्थान था जहाँ अनजाना भय भी हो सकता था, जंगली जानवर भी। पर मेरे भीतर डर नहीं, केवल विश्वास था। क्योंकि मन में एक दृढ़ आस्था थी — जब मालिक साथ हों, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। मैं खुद से संवाद करता हुआ आगे बढ़ता गया। हर कदम के साथ लगा कि मैं सिर्फ जंगल की पगडंडी पर नहीं, बल्कि अपने भीतर के भय और संदेह को भी पार कर रहा हूँ। साहस का अर्थ डर का अभाव नहीं, बल्कि विश्वास के साथ डर के बावजूद आगे बढ़ना है। उस दिन जंगल ने यही सिखाया। प्रकृति की गोद में यह यात्रा केवल रोमांच नहीं, बल्कि आत्म–खोज और आस्था का अनुभव थी। हर पेड़, हर हवा का झोंका मानो कह रहा था — “अपने भीतर की शक...