दयालबाग (आगरा) में होम्योपैथी क्षेत्र का विकास एवं सेवा मॉडल
दयालबाग, आगरा स्थित Dayalbagh Educational Institute ने होम्योपैथी चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा, सेवा और शोध को एकीकृत करते हुए एक अनूठा और जन-हितकारी मॉडल विकसित किया है।
यह मॉडल चिकित्सा शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण के समन्वय पर आधारित है, जहाँ चिकित्सा को केवल उपचार नहीं बल्कि जनसेवा का माध्यम माना जाता है।
Faculty of Integrated Medicine (AYUSH) के अंतर्गत संचालित होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक क्लिनिकल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है, जिससे वे व्यावहारिक अनुभव के साथ दक्ष चिकित्सक बन सकें।
संस्थान में OPD सेवाएँ तथा लगभग 30 बेड क्षमता वाली IPD सुविधा उपलब्ध है, जहाँ समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर जरूरतमंद मरीजों को सुलभ एवं किफायती चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। साथ ही, नियमित स्वास्थ्य शिविरों और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में होम्योपैथी चिकित्सा को व्यापक स्तर तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है।
यह समन्वित प्रणाली शिक्षा, शोध और सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहाँ चिकित्सा मानवता की सेवा का माध्यम बनती है।
✨ निष्कर्ष:
जब चिकित्सा शिक्षा और सेवा भावना एक साथ जुड़ती है, तो उसका प्रभाव समाज के हर वर्ग तक पहुँचकर दीर्घकालिक सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
निःशुल्क होम्योपैथी क्लिनिक – Kurnool Branch
इस शिविर का संचालन वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. के. भास्कर रेड्डी द्वारा किया गया। शिविर में लगभग 500 लोगों को लू से बचाव हेतु होम्योपैथिक औषधियाँ वितरित की गईं तथा प्रत्येक परिवार को एक माह तक उपयोग में आने वाली आवश्यक दवाइयाँ भी प्रदान की गईं।
कार्यक्रम के दौरान लोगों को गर्मी से बचाव, पर्याप्त जल सेवन तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। इस आयोजन में स्थानीय सहयोग के रूप में के. जी. गंगाधर रेड्डी (पूर्व अध्यक्ष, जिला ग्रंथालय समिति) का विशेष योगदान रहा।
रिपोर्टों के अनुसार, यह शिविर विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के रूप में भी आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य आम जनता को गर्मी से होने वाली समस्याओं से सुरक्षित रखना था।
यह पहल निःस्वार्थ समाज सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता और निःशुल्क चिकित्सा सहायता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
होम्योपैथी को बढ़ती लोकप्रियता – कर्नूल जिला रिपोर्ट
विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर जारी रिपोर्टों के अनुसार, होम्योपैथी के प्रति लोगों में विश्वास और स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। इसे दीर्घकालिक और पुरानी बीमारियों के लिए एक प्रभावी वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में देखा जा रहा है।
जिले में वर्तमान में 22 सरकारी होम्योपैथी डिस्पेंसरी (AYUSH एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत) संचालित हैं, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार हेतु पहुँचते हैं। प्रत्येक केंद्र पर औसतन 50 से 70 मरीज प्रतिदिन लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, होम्योपैथी की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सुरक्षित औषधियाँ और न्यूनतम दुष्प्रभाव हैं। यह विशेष रूप से एलर्जी, त्वचा रोग, जोड़ों का दर्द, माइग्रेन, गैस्ट्रिक समस्या एवं तनाव संबंधी रोगों में उपयोगी मानी जाती है।
चिकित्सकों की राय
सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. भारतीदेवी के अनुसार, होम्योपैथी केवल रोगों का उपचार नहीं करती, बल्कि शरीर, मन और मानसिक संतुलन को बनाए रखने में भी सहायक है।
निःशुल्क सेवा का 40 वर्षों का योगदान
डॉ. के. भास्कर रेड्डी ने बताया कि दयालबाग राधास्वामी चैरिटेबल होम्योपैथिक डिस्पेंसरी द्वारा कर्नूल के धर्मपेट क्षेत्र में पिछले 40 वर्षों से निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान की जा रही है।
- प्रतिदिन सुबह एवं शाम ओपीडी सेवा
- प्रत्येक बुधवार घर-घर जाकर मात्र ₹1 शुल्क में उपचार
- हर दूसरे शनिवार को कोटेकल गांव में लगभग 500 मरीजों का निःशुल्क शिविर
अंत में
होम्योपैथी आज ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एक भरोसेमंद वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
प्रेरणादायक परिचय एवं समाज सेवा
डॉ. मोहित सतसंगी, जो आगरा के प्रेम नगर (दयालबाग गेट के पास) में दयालबाग निःशुल्क होम्योपैथी क्लिनिक संचालित करते हैं, वर्षों से निःस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहे हैं। उनके द्वारा समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जाता है।
उनके कार्य समाज में स्वास्थ्य जागरूकता और मानवता की भावना को सशक्त बनाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान एवं सहभागिता
डॉ. मोहित सतसंगी को होम्योपैथी एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उनके योगदान हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्हें London Book of World Records द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किया गया (07 जून 2025)।
वे Homoeopathy Summit – 3 (International Conference) जैसे वैश्विक मंचों से जुड़े रहे, जिसमें ब्राज़ील, नीदरलैंड, सर्बिया, यूके और USA जैसे देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह आयोजन जर्मनी के Hahnemann City of Köthen में संपन्न हुआ।
साथ ही, वे ब्रिटिश संसद (Houses of Parliament, London) में आयोजित UK–India Conference on Holistic Medicine से भी जुड़े रहे, जहाँ समग्र चिकित्सा पर वैश्विक संवाद हुआ।
संदेश
ये उपलब्धियाँ इस बात का संकेत हैं कि समग्र चिकित्सा और होम्योपैथी विश्व स्तर पर तेजी से स्वीकार्यता प्राप्त कर रही हैं और मानव स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ 🙏
रा धा स्व आ मी 🙏
— 📌 Anand Kishor Mehta






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