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A Meeting with Myself

खुद से साक्षात्कार 



ज़िंदगी में ऐसा समय आता है जब हर कोई आपसे परेशान लगता है
कोई आपके दुख से, कोई आपकी खुशी से, कोई आपके हर कदम या फैसले से।
मैं बस चाहता था कि कोई मेरी बात सुने। मुझे समझे

धीरे-धीरे, मैं खुद से भी परेशान हो गया।
अपने विचारों, डर और बेचैनी में खो गया, और महसूस किया कि जो शांति मैं बाहर ढूँढ रहा था, वह केवल अंदर ही मिल सकती है

दुनिया में खो गया, खुद में खो गया… और फिर मैंने पाई अजेय शांति।

फिर वह स्पष्टता का पल आया —
जब मैंने खुद को पूरी तरह स्वीकार किया, बिना किसी बहाने या उम्मीद के।
तभी मैंने पाया अटूट, पूरी तरह मेरी अपनी शांति

सच्ची ताकत किसी को खुश करने या अपेक्षाओं को पूरा करने में नहीं है।
सच्ची ताकत आती है अपने सत्य से जुड़कर और अपने भीतर की आवाज़ सुनकर

“लोग परेशान होते रहेंगे, दुनिया अपनी राह चलेगी,
लेकिन जब आप खुद से शांत हो जाते हैं, तब कोई ताकत आपको हिला नहीं सकती।”


A Meeting with Myself 

There comes a time in life when everyone seems troubled by you
by your sorrows, your joys, your actions.
I only wished to be heard. To be understood.

Gradually, I even became troubled with myself.
Lost in my own thoughts, fears, and restlessness, I realized that the peace I was seeking outside could only be found within.

Lost in the world, lost in myself… and then I discovered an unshakable peace.

Then came the moment of clarity —
when I accepted myself fully, without excuses or expectations.
That’s when I discovered an invincible, truly my own peace.

True strength doesn’t come from pleasing everyone or meeting expectations.
It comes from connecting with your own truth and listening to the voice within.

“People will remain disturbed, the world will move on,
but when you are at peace with yourself, no force can shake you.”





- A K Mehta 

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