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कविता श्रृंखला शीर्षक: अपनी राह थामो


अपनी राह थामो – प्रेरक कविताएँ और जीवन के रंग 



सुप्रभात 

कभी मायूस मत होना,
ज़िंदगी ठहरती नहीं।

जो आज भारी लगता है,
कल वही हल्का होगा।

जो आज अधूरा है,
कल वही मुकम्मल होगा।

हर ठोकर राह दिखाती है,
हर दर्द ताक़त बन जाता है।

रात चाहे कितनी भी गहरी हो,
सुबह आना नहीं भूलती।

हौसला थामे रखना,
विश्वास जीवित रखना।

ज़िंदगी अक्सर
अचानक ही मुस्कुरा देती है। 

बस आगे बढ़ते रहो…
और मुस्कुराते रहो। 🙏

— Anand Kishor Mehta


जीवन का उत्सव

ब्रेवो सुपरिमल ऐक्टेवो—
नव जीवन का जोश जगाओ,
आशा का दीप जलाओ मन में,
हर क्षण प्रकाश फैलाओ।

रा धा/ध: स्व आ मी !
मंत्र गूँजे अंतरमन में,
शक्ति बहे हर एक कण में,
साहस–विश्वास संग मुस्काओ,
जीवन राग सुनाओ।

खेलो कूदो नाचो गाओ,
मन को मुक्त उड़ान दो,
हँसी–खुशी की लहरों में,
जीवन को पहचान दो।

जश्न मनाओ, फिर–फिर आओ…
हर पल उत्सव, हर श्वास गान,
छोटे सुख में अनंत आनंद —
यही जीवन, यही सम्मान।

मालिक जी की अति दया–मेहर से
यह पावन मंत्र मिला,
कृपा की अमृत वर्षा से
जीवन का हर पथ खिला।

आनन्द किशोर मेहता


जब मालिक साथ हो 

जब मालिक साथ हो,
तो कमी किस बात की।

सूनी राह भी लगती है,
जैसे हो बरसात सी।

अँधेरा कितना भी घना हो,
रोशनी हारती नहीं।

तूफ़ान लाख उठें चाहे,
नाव डूबती नहीं।

मन थक जाए जब कभी,
वही साहस बन जाता है।

टूटी हुई हर उम्मीद को,
वही फिर से सजाता है।

जब मालिक साथ हो,
तो डर भी सिर झुका देता है।

बस उसका भरोसा रखो—
वही जीवन संवार देता है। 🙏

Anand Kishor Mehta


खुद को मत खोना 

खो मत जाना
इस दुनिया के रिश्तों में उलझकर।

यदि कभी खुद से दूर हो जाओ,
तो घबराना मत।

धीरे से पकड़ लेना
मालिक की उँगली।

तुमसे भूल हो जाए कभी,
तो भी वह दूर नहीं होता।

हाँ, राह में थोड़ी तकलीफ़ होगी,
कुछ आँसू भी आएँगे।

पर खुद को छोड़ना मत,
विश्वास को टूटने मत देना।

अपनी डोर थामे रखना
उनके चरणों से प्रेम से।

क्योंकि वह गिरने नहीं देता,
बस सँभलना सिखाता है। 🙏

Anand Kishor Mehta


सतसंग की संपत्ति 

सतसंग की संपत्ति पावन है।
यह सबकी अमानत है।

अधिकार जताना आसान है,
पर सेवा ही सच्ची भक्ति है।

उपेक्षा से नष्ट हो जाए,
तो श्रद्धा का अपमान होता है।

संभालने वाला सेवक,
वही जानता समर्पण। 

सत्संग की सेवा करना,
मालिक के चरणों का सम्मान है।

🙏 यह अधिकार नहीं,
यह पवित्र जिम्मेदारी है।

— Anand Kishor Mehta



भीतर की आवाज़

हर पीड़ा को शब्द नहीं मिलते,
कुछ घाव सिर्फ भीतर धड़कते हैं।
वे दिखाई नहीं देते,
पर जीवन की दिशा बदल देते हैं।

हम खुद से कहते रहते हैं —
मजबूत बनो,
चुप रहो,
किसी को अपनी कमजोरी मत दिखाओ।

धीरे-धीरे हम
मुस्कान को कवच बना लेते हैं,
और अपने असली एहसास
दिल की तहों में रख देते हैं।

दुनिया हमें संतुलित समझती है,
क्योंकि हम बिखरते नहीं दिखते।
पर सच यह है —
अंदर का संघर्ष भी साहस मांगता है।

परिपक्वता कठोर होना नहीं,
कोमल रहकर भी स्थिर रहना है।
संवेदनशीलता कमजोरी नहीं,
वह आत्मा की गहराई है।

उपचार शोर से नहीं आता,
वह स्वीकृति की शांति में जन्म लेता है।
जब हम खुद से कहते हैं —
“मैं जैसा हूँ, वैसा ठीक हूँ,”
तभी आत्मसम्मान साँस लेता है।

भावनाएँ बोझ नहीं,
वे जीवन का स्पंदन हैं।
और स्वयं को पूरी सच्चाई से स्वीकार कर लेना
सबसे मौन, पर सबसे महान साहस है।

— Anand Kishor Mehta


मेरी सोच

दुनिया बदल रही है।
ज्ञान चारों ओर है।

AI दिखाता है राह।
पर सोच मेरी खुद की।

गलती बनती है मार्गदर्शक।
संघर्ष देता है शक्ति।

अनुभव है असली शिक्षक।
ज्ञान मशीन का, पर दिल मेरा।

सफलता मेहनत से मिलती है।
AI है साथी,
मानवता है अनमोल।

सेवा मेरी पहचान।
मैं चुनूँ सोच।
मैं चुनूँ अपना रास्ता।

— Anand Kishor Mehta


नई शुरुआत

जब मन थक जाए,
और कदम डगमगाने लगें,
तो याद रखना —
रास्ते खत्म नहीं होते,
हम हिम्मत छोड़ देते हैं।

गलती हुई तो क्या हुआ,
वह भी तो जीवन का ही पाठ है।
ईश्वर हर ठोकर में
एक संकेत छुपा देता है,
कि “संभल जाओ, अभी देर नहीं।”

बीता हुआ कल धुआँ है,
उसे मुट्ठी में पकड़ोगे तो
आँखें ही जलेंगी।

आज की सुबह को थाम लो,
यही सच्चा अवसर है।
गिरना कमजोरी नहीं,
गिरकर उठना ही भक्ति है,
विश्वास है,
और साहस है।

चलो फिर से कदम बढ़ाएँ,
मन हल्का रखें,
और उस दिशा में चलें
जहाँ शांति और विश्वास साथ हों। 

— Anand Kishor Mehta


जंगल की आवाज़ | राजाबरारी 

राजाबरारी के घने जंगल में
मैं अकेला बढ़ता चला।

हर कदम पर विश्वास साथ था।
पत्तों की सरसराहट कुछ कहती।

पंछियों की पुकार भीतर सुनाई।
बरसाती नदी तेज बहती।

नीरव जंगल भी कर रहा संवाद।
हर शाखा, हर पत्थर संदेश दे रहा।

डर के बावजूद बढ़ते रहो।
अंधेरा और अनजानी राहें थीं।

साहस और विश्वास ने मार्ग खोला।
हर कदम आत्म–खोज का संकेत।

प्रकृति की हर आवाज़ बोलती।
भीतर की शक्ति को पहचानती।
राजाबरारी में मिला सच्चा अहसास। 

— Anand Kishor Mehta


राजाबरारी के बच्चे

गांव की गलियाँ, शांत और प्यारी
हँसी और खुशी से भरी सारी।

दौड़ते, कूदते, खेल में खोये
हर पल में बचपन के रंग छाये।

मिट्टी की खुशबू, हवा की बातें
हर मुस्कान में मासूमियत के साये।

पढ़ाई में भी लगे, सीख के संग
दयालबाग के संस्कार बनाते जीवन रंग।

हर किक में उमंग, हर दौड़ में प्यार
खेल और सीख का मिलता अद्भुत संसार।

संस्कार, मस्ती और हँसी का मेल
बच्चों में उभरता जीवन का खेल।

मस्ती, सीख और हँसी का संगम
राजाबरारी के बच्चों की यही पहचान।
 

— Anand Kishor Mehta



सतसंग और नवाचार 

सत्संग की ज्योति जलाएँ,
नई दिशा भी अपनाएँ।
भक्ति में सच्ची शक्ति लेकर,
सेवा से जग महकाएँ।

केवल बातों तक न रुकें हम,
कुछ करके भी दिखलाएँ।
नई सोच के दीप जलाकर,
अंधेरों को दूर भगाएँ।

शिक्षा में नई राह बनाएँ,
युवाओं को आगे बढ़ाएँ।
प्रकृति की गोद सँभालें मिलकर,
धरती का मान बढ़ाएँ।

जब भक्ति कर्म से मिलती है,
जीवन मधुर हो जाए।
सत्संग से सेवा बह निकले,
सेवा से नव युग आए।

आओ मिलकर कदम बढ़ाएँ,
अपना सुंदर समाज बनाएँ। 

— Anand Kishor Mehta



मैं से हम तक

जब तक “मैं” का पर्दा आँखों पर,
कैसे दिखे वो नूर?
जब तक खुद को अलग समझें,
कैसे मिले हुज़ूर?

रूह तो दरिया की बूंद है बस,
दरिया से क्या दूरी?
अलगाव की ये झूठी सरहद,
बस मन की मजबूरी।

तू ही मंदिर, तू ही मस्जिद,
तू ही भीतर का साज़,
जिस दिन “मैं” को छोड़ दिया,
उसी दिन खुला राज।

अकेलापन भी भरम ही निकला,
जब देखा दिल के पार,
हर चेहरा उसका चेहरा था,
हर साँस में था प्यार।

जब तक अलगाव है, हम अकेला हैं,
यह जग सूना-सूना है;
ज्यों ही मिलन हुआ भीतर से,
हर कण में वही नूर है।

✍️ आनंद किशोर मेहता


गलतियाँ और सफ़र

गलतियाँ रुकावटें नहीं,
वे हैं हमारे सच्चे साथी।
हर ठोकर, हर मोड़,
सिखाता है कुछ नया, कुछ खास।

भूलों में मत फँसो,
सीखो, संभलो, आगे बढ़ो।
हर कदम पर है रोशनी,
हर गलती बनाए सफ़र को खूबसूरत।

अतीत को दोष मत दो,
यह सिर्फ़ है सीख का स्रोत।
गलतियों की राह से मत डर,
अनुभव छुपा है हर मोड़ पर।

हर प्रयास में छुपा है मूल्य,
हर गिरावट में अवसर छुपा।
सीखो, समझो, और बढ़ते चलो,
यही है सच्चा विकास, यही जीवन का खेल।

— Anand Kishor Mehta



मानवता की ज्योति 

सद्विचारों की दिव्य ज्योति
तभी जग में प्रकाश बनती है,
जब वह कुछ मनों की सीमाएँ छोड़कर
सबके हृदय की चेतना बन जाती है।

एक छोटी-सी शुभ भावना भी
अनगिनत मनों को छू जाती है,
और आशा की कोमल किरण बनकर
जीवन-पथ को आलोकित कर जाती है।

आइए, हम ऐसे विचार जगाएँ
जो मन को ऊँचा उठाएँ,
ऐसे कर्म करें
जो मानवता को और सुंदर बनाएँ।

सेवा, प्रेम और सद्भाव से
प्रेरणा की यह धारा बहाएँ,
ताकि हर हृदय में विश्वास खिले
और हर मन में उजियारा छा जाए।

मानवता की यह पावन ज्योति
हर दिल में सदा जलती रहे,
और प्रेम व सेवा का संदेश
संसार के हर कोने में
मधुर प्रकाश बनकर फैलता रहे। 

A K Mehta


खुद की जीत

दूसरों की चिंता छोड़ो,
खुद से रिश्ता जोड़ो।

जो खुद को समझता है,
वही जीवन को जीतता है।

दुनिया की राहें लंबी हैं,
सबसे कठिन सफर भीतर है।

खुद को सँवारो, खुद को निखारो,
यही सफलता का सच्चा द्वार है।

अपने भीतर की विजय पाओ,
यही जीवन का असली श्रृंगार है।

आनंद किशोर मेहता


स्वतंत्रता — जीवन की रोशनी

स्वतंत्रता की हवा बहती,
हर दिल में सुकून खिलता।

बंधन टूटें, अरमान खुलें,
मन में रोशनी चमकती।

स्वतंत्रता मोती है,
अनुशासन में दमकती।

हर कदम आशा लाए,
हर सांस जीवन मिठास।

जो इसे अपनाए,
पाए आत्मा की पहचान।

सपनों को सजाएँ,
मन में प्रेम और शांति।

अनुशासन और स्वतंत्रता साथ,
जीवन बन जाए प्रकाशमय।

आनंद किशोर मेहता


स्वतंत्र जीवन

तन के बंधन टूटें,
मन की बेड़ियाँ छूटें।

धन का मोह मिटे,
सवेरा खिल उठे जीवन।

हर साँस में शांति,
हर कदम में रोशनी।

बंधनों से मुक्ति,
दिल में आत्मविश्वास।

मुक्ति की बेला निराली,
हर ओर फैले उजियाली।

मन और आत्मा संगम,
दुनिया में बिखरे चमक।

आनंद किशोर मेहता



सेवा और सतसंग

दयालबाग में बहती दया,
सतसंग में खिलता किनारा।

सुबह-शाम समय पावन,
हर पल अनुभव मालिक का।

भाई-बहन मिलकर सेवा करें,
जीवन चमके चार घंटे में।

घर बैठे जुड़ें ऑनलाइन,
मालिक की मेहर निर्मल मन।

सेवा में शांति, सतसंग में आनंद,
मन में खिलें दीनता का बगान।

कर्म और भक्ति का संगम,
जीवन में लाए सत्य प्रकाश।

आओ मिलकर अपनाएँ अवसर,
खेत सेवा में हर क्षण बिताएँ।

सतसंग और सेवा से जीवन,
हो जाए सुखमयी और उजियाली।

आनंद किशोर मेहता


जागृति की राह

चेतना जब जागती है,
भ्रम सब मिट जाता है।

अब दोष किसी का नहीं,
गलती केवल अपनी है।

बीते कल को छोड़ दो,
नई रोशनी चुनो।

अंधेरों को पीछे छोड़ो,
सीख अपने कर्म में ढालो।

जो हुआ, उसका बोझ मत ढो,
अब समय है बढ़ने का।

शक्ति अपनी पहचानो,
हर राह आसान होगी।

दूसरों को दोष न दो,
सिर्फ अपने कर्म बदलो।

हर कदम, हर निर्णय मेरा,
जागृति की राह में मैं अपना साथी हूँ।

— आनंद किशोर मेहता


🌿 सेवा और विनम्रता

चुप्पी में मेरी शक्ति।
विनम्रता हर कदम में।

सेवा मेरा मार्ग।
करुणा मेरे शब्दों में।

मैं तुलना नहीं करता।
बस खुद से बेहतर बनता हूँ।

मन के तूफ़ानों में भी स्थिर।
गिरूँ, संभलूँ, फिर बढ़ता हूँ।

कभी किसी को दुख न पहुँचाऊँ।
सिर्फ शांति और प्रेम फैलाऊँ।

हर कर्म में अर्थ।
हर कार्य में सच्चाई।

सादगी में गहराई।
अदृश्य में असर।

ऐसा जीवन, जहाँ सेवा, शक्ति और विनम्रता हमेशा साथ हों।

A.K. Mehta


बारिश में आँसू

हम समय की धारा में बहते हैं,
जैसे अनंत बारिश में गिरते आँसू।

हमारे नाम मिट जाएंगे,
हमारी आवाज़ें चुप्पियों में खो जाएँगी।

जो हमने चाहा,
जो हमने प्यार किया,
सब यादों की छाया में विलीन हो जाएगा।

पर जो हम देते हैं,
वह रह जाता है—
एक शब्द में, एक स्पर्श में, एक मौन कर्म में।

लहरें जो हमारे दिनों से आगे तक चलती हैं,
गूँज जो कभी नहीं खोती।

जीवन केवल वर्षों का माप नहीं,
बल्कि उस गहराई का नाम है, जिससे हम जीते हैं।

लेखक: A K Mehta


विश्वास की रोशनी

विश्वास रखो, अंधेरा भी ढल जाएगा,
हर टूटा सपना फिर से खिल जाएगा।

जो दर्द आज तुम्हें रुलाता है,
वही कल तुम्हें सबसे मजबूत बनाता है।

रास्ते मुश्किल हों तो ठहरना मत,
अपने हौसलों को कभी बिखरना मत।

हर गिरना तुम्हें चलना सिखाएगा,
हर आँसू तुम्हें मुस्कुराना सिखाएगा।

अगर रात गहरी है, तो सवेरा भी होगा,
हर सूखे पेड़ पर फिर बसेरा भी होगा।

बस खुद पर अपना विश्वास बनाए रखना,
हर हाल में दिल को रोशन बनाए रखना।

क्योंकि जो तूफानों में भी चलते जाते हैं,
वही लोग एक दिन इतिहास बनाते हैं।

— A K Mehta


दूसरों को परखना आसान है, खुद को सुधारना महानता है। 


— Anand Kishor Mehta

ख़ामोशी में छुपा हुआ प्रेम

ख़ामोशी में छुपा हुआ प्रेम,
शब्दों की ज़रूरत नहीं रखता।
वो आँखों की नमी में दिखता है,
और दिल की धड़कन में बसता है।

ना ये शोर मचाता है,
ना दुनिया को बताता है।
पर हर पल साथ चलता है,
जैसे साया निभाता है।

कभी दूरी में भी पास होता है,
कभी पास होकर भी अनकहा रहता है।
ये वो एहसास है जो बोलता नहीं,
पर हर दर्द को समझ लेता है।

जिसने इसे महसूस कर लिया,
उसे फिर कुछ और नहीं चाहिए।
क्योंकि ख़ामोशी में छुपा प्रेम ही,
सबसे सच्चा और गहरा रिश्ता है।

Anand Kishor Mehta

जिसको ख़ामोशी से प्रेम हो जाए

जिसको ख़ामोशी से प्रेम हो जाए,
वो शोर से रिश्ता तोड़ लेता है।
वो हर जवाब शब्दों में नहीं ढूँढता,
वो एहसासों से बोलना सीख लेता है।

उसकी चुप्पी भी कहानी कहती है,
जो भी सुन ले, वो बदल जाता है।
वो भीड़ में रहकर भी दूर नहीं होता,
बस अपने भीतर उतर जाता है।

ना उसे दिखावे की चाह रहती है,
ना ताली की कोई जरूरत होती है।
उसका संसार थोड़ा अलग होता है,
जहाँ सादगी ही सबसे बड़ी दौलत होती है।

ख़ामोशी उसके लिए खाली नहीं,
वो सबसे गहरा संवाद बन जाती है।
जो उसे समझ ले दिल से एक बार,
उसकी दुनिया आसान हो जाती है।

Anand Kishor Mehta

मध्य की शांति

ना शब्द हैं, ना आवाज़।
फिर भी भीतर कुछ चलता रहता है।

कहीं एक दौड़ है…
जो खुद को ही खो देती है।

कहीं एक मौन है…
जो सबका भार उठाता है।

और कहीं एक प्रकाश है…
जो शांत खड़ा है।

ना बहुत पास, ना बहुत दूर।
बस मध्य में।

जहाँ “मैं” भी शांत हो जाता है।
और “अन्य” भी हल्का।

सब संतुलित हो जाता है।

और उसी संतुलन में
एक समझ मिलती है—

कि जीवन संघर्ष नहीं।
यह संतुलन है।

Anand Kishor Mehta

“मौन संतोष”

मैं हमेशा खुश रहता हूँ…
ना इसलिए कि जीवन सही है,
बल्कि इसलिए कि मैंने
उम्मीदें छोड़ दी हैं।

अब किसी से कोई चाह नहीं,
ना किसी का इंतज़ार…
मैंने सीख लिया है
अपने मन के साथ रहना।

अपेक्षाएँ धीरे-धीरे मिट गईं,
जैसे सुबह की धुंध में तारे…
और वहीं, उसी सन्नाटे में
मिला सच्चा सुकून हमारे।

अब छोटी-छोटी बातें भी अपनी लगती हैं,
हर पल में एक हल्की सी खुशी है…
क्योंकि खुशी अब बाहर नहीं,
मेरे भीतर ही बसी है।

A. K. Mehta

समझ — सबसे बड़ी ज़रूरत

किताबों ने कहा—
“मुझे पढ़ो, मैं रास्ता दिखाऊँगी…”
सोच ने कहा—
“मुझे अपनाओ, मैं सवाल उठाऊँगी…”

दोनों साथ चले कुछ दूर तक,
फिर जीवन मोड़ पर खड़ा मिला…
जहाँ हर उत्तर अधूरा लगा,
और हर ज्ञान थोड़ा सा खला।

तभी चुपचाप आई एक आवाज़—
ना शोर, ना कोई दावा था…
वो बोली—
“मैं समझ हूँ… बस एहसास सा था।”

मैंने न कुछ सिखाया,
न कोई नियम बताया…
बस इतना किया—
जो देखा, उसे सही रूप में दिखाया।

शिक्षा ने आँखें खोली थीं,
सोच ने सपने सजाए थे…
पर समझ ने दिल को छुआ,
और सच से हमें मिलवाया था।

आज भी दुनिया दौड़ रही है,
नाम, पहचान, जीत के पीछे…
पर जो खुद को समझ गया,
वही सबसे आगे है—भीड़ से अलग।

— A K Mehta


छोटे पल, बड़ी सीख

हर पल ने मुझे पुकारा—
“कुछ सीख ले… मैं यूँ ही नहीं आया।”

मैंने ठहरकर सुना,
छोटी-सी बातों को भी अपनाया।

न कोई बड़ा मौका था,
न कोई शोर था,
बस रोज़ का एक छोटा कदम—
जो मुझे मुझसे बेहतर बनाता रहा।

ठोकरें भी गुरु बनीं,
खामोशी भी सिखाती रही,
और यूँ ही धीरे-धीरे
मेरी राह खुद बनती गई।

अब समझ आया—
ऊँचाई अचानक नहीं मिलती,
वो हर दिन की छोटी जीतों से बनती है।

आज भी कुछ नया सीखा है…
और यही मेरी सबसे बड़ी जीत है। 🌱

— A K Mehta









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