THOUGHTS:-
Thoughts — आनंद किशोर मेहता
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ना मुझे काना-फूसी भाती है, ना जी-हुजूरी रास आती है; मैं तो बस प्रेम का राही हूँ।
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झूठ के सहारे बड़ी-बड़ी बातें की जा सकती हैं, लेकिन मानवता की ऊँचाई केवल सच से ही हासिल होती है।
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मानवता कोई वेश नहीं, जिसे ज़रूरत के हिसाब से बदला जा सके — यह तो आत्मा की असली परछाई है।
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जहाँ स्वार्थ बोलते हैं, वहाँ वास्तविकता खामोश हो जाती है — क्योंकि वह दिखावे की मोहताज नहीं होती।
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जो अपने ही मन की भ्रमों और दुर्बलताओं पर विजय पा ले — वही सच्चा शूरवीर है।
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माँ-बाप वो साया हैं जो धूप में जलते हुए भी हमें ठंडक देते हैं — और हम छाँव में रहकर भी उनकी तपन को नज़रअंदाज़ कर जाते हैं।
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दुनिया चाहे झूठ बोले या भ्रम फैलाए — पर अंततः तुम्हारा कर्म ही तुम्हारी पहचान बनता है।
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कृतज्ञता वह चाबी है जो हमारे पास मौजूद चीज़ों को ही पर्याप्त बना देती है।
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जीवन एक यात्रा है — कुछ साथ चलते हैं, कुछ मोड़ पर विदा लेते हैं, पर जिनसे प्रेम था, वे कभी दूर नहीं जाते।
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असली संघर्ष सड़क पर नहीं, अंदर की चुप्पी में छिपा होता है।
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कुछ स्थितियाँ स्वीकारना ही शांति की शुरुआत है — यह कमजोरी नहीं, परिपक्वता है।
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कभी सोचा था कि शब्दों से हल्का हो जाऊँगा, पर अब लगता है — शब्द भी बोझ बन गए हैं, क्योंकि सुनने वाला दिल नहीं रहा…
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हर मुस्कान सच्ची नहीं होती — कभी-कभी वह दर्द का सबसे सुंदर पर्दा होती है।
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हर बार चुप रहना विनम्रता नहीं — कभी-कभी यह खुद से की गई सबसे बड़ी बेईमानी होती है।
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दुनिया बस सुनना चाहती है वही, जो समझ सके। और मेरी कहानी — या तो बहुत गहरी है, या बहुत अकेली…
आनन्द किशोर मेहता

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