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दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को राष्ट्रीय विश्वकर्मा पुरस्कार – राजाबरारी के विकास में ऐतिहासिक योगदान

दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को राष्ट्रीय विश्वकर्मा पुरस्कार – राजाबरारी के विकास में ऐतिहासिक योगदान

शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए, दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) ने राष्ट्रीय विश्वकर्मा पुरस्कार 2019 में देशभर के 188 संस्थानों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह सम्मान अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा प्रदान किया गया, जो संस्थान की ग्रामीण विकास और कौशल उन्नयन में उत्कृष्ट भूमिका को दर्शाता है।

इस उपलब्धि की खबर दैनिक जागरण में प्रकाशित हुई थी और राजाबरारी क्षेत्र के लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सम्मान के पीछे DEI का अथक परिश्रम और समर्पण रहा है।


राजाबरारी क्षेत्र में विकास की नई रोशनी

हरदा जिले के राजाबरारी क्षेत्र में, जहां शिक्षा और रोजगार के सीमित साधन थे, वहां दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट ने अपने अभिनव प्रयासों से नई क्रांति लाई है। संस्थान ने न केवल शिक्षा को बढ़ावा दिया बल्कि कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से सैकड़ों ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया।

संस्थान द्वारा निम्नलिखित कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया:

✔ सिलाई, कढ़ाई और ब्लॉक प्रिंटिंग
✔ सॉफ्ट टॉय मेकिंग और हस्तशिल्प
✔ फूड प्रोसेसिंग और मसाला निर्माण
✔ ऑटोमोबाइल रिपेयर और वेल्डिंग
✔ डेयरी उत्पाद निर्माण और विपणन

इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups - SHGs) को भी संगठित किया गया, जिससे स्थानीय ग्रामीण अपने हस्तशिल्प और उत्पादों को बाज़ार में बेचकर अपनी आय बढ़ा सकें।


डिजिटल इंडिया की ओर बड़ा कदम

तकनीक को गाँवों तक पहुँचाने की दिशा में, DEI ने 50 किलोमीटर लंबा वायरलेस नेटवर्क स्थापित किया, जो 17 से अधिक गाँवों में हाई-स्पीड इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान कर रहा है।

➡ इससे मिली प्रमुख सुविधाएँ:
✔ गाँवों में ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल क्लासरूम
✔ टेलीमेडिसिन सेवाएँ, जिससे ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें
✔ ग्रामीण उद्यमियों को ऑनलाइन मार्केटिंग और व्यापार में मदद

विशेषज्ञों ने इसे "डिजिटल इंडिया का एक उत्कृष्ट उदाहरण" बताया है।


अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

संस्थान के विद्यार्थियों को विदेशों में अध्ययन और प्रशिक्षण के अवसर भी मिल रहे हैं। हाल ही में, राजाबरारी क्षेत्र की कुमारी आरती वर्मा को कनाडा के सैनेका कॉलेज में दो सप्ताह के विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। वहीं, कुमारी रेनिका यादव जल्द ही हांगकांग में अध्ययन के लिए रवाना होंगी।

यह उपलब्धि न केवल इन छात्रों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।


वैज्ञानिक सोच और नवाचार की दिशा में कदम

संस्थान ने हाल ही में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और भारतीय जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से राजाबरारी में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों ने छात्रों को प्रेरित किया।

➡ इसके अलावा, इंडियन नेशनल साइंस अकादमी (Indian National Science Academy - INSA) द्वारा भी विज्ञान और अनुसंधान पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

यह प्रयास स्थानीय विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।


एक प्रेरणादायक उपलब्धि – भविष्य की ओर एक कदम

दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की यह सफलता केवल एक पुरस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, तकनीक और सामाजिक विकास के समग्र दृष्टिकोण का एक आदर्श उदाहरण है। संस्थान ने यह साबित कर दिया है कि नवाचार और समर्पण से किसी भी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।

➡ इस पुरस्कार के मायने:
✔ देशभर में DEI की प्रशंसा – एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में
✔ गाँवों में उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक शोध और डिजिटल विकास को बढ़ावा
✔ भारत सरकार और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से भविष्य में और अधिक सहयोग की संभावना


अंत में, मेरी ओर से हार्दिक बधाई!

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, उसके शिक्षकों, छात्रों और सभी सहयोगियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।

➡ यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, शिक्षा और तकनीकी नवाचार का एक नया अध्याय है।
➡ आने वाले वर्षों में, संस्थान नए कीर्तिमान स्थापित करता रहे, यही मेरी शुभेच्छा है!


(इस समाचार की पुष्टि दैनिक जागरण समाचार पत्र एवं राजाबरारी से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई है।)


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