सोच और सम्मान: जीवन का सच्चा मूल्य
न कोई बड़ा, न कोई छोटा—बस सोच का अंतर। यही सूत्र है जो बताता है कि जीवन में वास्तव में सम्मान कैसे प्राप्त होता है। अक्सर हम सोचते हैं कि सम्मान पद, उम्र या बाहरी प्रतिष्ठा से आता है। लेकिन सच्चाई यह है कि समाज में हमारे लिए जो आदर मिलता है, वह हमारे सोचने और व्यवहार करने के तरीके पर निर्भर करता है।
जैसा हम दूसरों के साथ व्यवहार करते हैं, वैसा ही हमें वापस मिलता है। अगर हमारी सोच सकारात्मक, सरल और निष्कपट है, तो लोग हमारे प्रति सम्मान और आदर दिखाते हैं। और यदि हमारी सोच स्वार्थी या दिखावटी है, तो चाहे हम किसी ऊँचे पद पर क्यों न हों, असली सम्मान नहीं मिल पाता।
सोच ही वह मापदंड है जो हमें “बड़ा” या “छोटा” बनाती है। एक साधारण व्यक्ति, जिसकी सोच और कर्म ऊँचे हैं, समाज में किसी बड़े पद वाले से अधिक आदर और सम्मान पा सकता है। इसका अर्थ है कि सम्मान की परिभाषा बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होती है।
इसलिए जीवन में हमें चाहिए कि हम अपनी सोच और व्यवहार को सुधारें। अपने कर्मों में सच्चाई, ईमानदारी और सद्भाव रखें। ऐसा करने से न केवल हमारे व्यक्तिगत संबंध मजबूत होंगे, बल्कि समाज में भी हमारा स्थान सशक्त और सम्मानजनक बनेगा।
अंततः यह कहा जा सकता है: जैसा अभिनय, वैसा सम्मान। पद, उम्र या नाम केवल आभासी मान्यता हैं; असली सम्मान वही है जो आपकी सोच और कर्मों की गहराई से उत्पन्न होता है।

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