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How Does the Awakening of Consciousness Transform Human Life?

How Does the Awakening of Consciousness Transform Human Life?  The awakening of consciousness brings a profound and lasting transformation to human life. As long as a person lives only through the mind and its desires, life remains restless and confused. The mind continually chases wants, becoming entangled in expectations, fears, and comparisons. When consciousness begins to awaken, life gradually shifts from outer pursuit to inner understanding. This awakening is the realization of one’s true inner self. It does not arise from external success, status, or praise, but through selfless service, inner discipline, and sincere action. As the ego slowly loosens its hold, clarity replaces confusion, and an inner light begins to guide one’s thoughts and actions. With awakened consciousness, a person stops blaming circumstances or others. They recognize that genuine change must occur within. Whether faced with praise or criticism, gain or loss, their inner balance remains steady. This inn...

जब स्वार्थ टूटेगा, तब परमार्थ गूँजेगा

जब स्वार्थ टूटेगा, तब परमार्थ गूँजेगा आज का मानव जीवन अक्सर स्वार्थ और व्यक्तिगत इच्छाओं के घेरे में फँसा दिखाई देता है। जिसे छोड़ना कठिन लगे, वही सबसे बड़ा बंधन बन जाता है। यही बंधन आज हमारे समाज का सबसे प्रमुख जाल है — स्वार्थ। हम इसे कभी-कभी स्वतंत्रता समझ लेते हैं, जबकि यह केवल हमारी दृष्टि और कर्मों को सीमित करने वाली जंजीरें हैं। स्वार्थ का त्याग किसी वास्तविक मृत्यु का संकेत नहीं देता; यह तो पुराने अहंकार, भ्रम और सीमाओं का अंत है। पर यह सत्य समझने में समय लगता है। हर हृदय में परमार्थ का बीज मौजूद है, लेकिन स्वार्थ की परतें उसे ढक देती हैं। इसलिए हम भीतर से महसूस करने के बावजूद उसे अपनाने में असमर्थ रहते हैं। फिर भी, समय और अनुभव की शक्ति अद्भुत है। जब स्वार्थ अपने ही भार से टूटेगा, तब परमार्थ स्वतः आकर्षण बन जाएगा। यह आकर्षण घोषणाओं से नहीं, बल्कि शांत और निस्वार्थ कर्मों से फैलता है। यही शक्ति है, जो धीरे-धीरे समाज और व्यक्तियों को बदल देती है। जब ‘ मैं ’ से मन भर जाएगा, तब ‘ हम ’ की ओर यात्रा स्वाभाविक रूप से शुरू होगी। यह यात्रा कठिन या बोझिल नहीं होगी, बल्कि जीवन क...

विश्व आज: संकट, शांति और हमारी जिम्मेदारी | A K Mehta

विश्व आज: संकट और हमारी जिम्मेदारी  — आनंद किशोर मेहता आज का विश्व गहरे संकट में है। घरों में बेचैनी, गलियों में तनाव और समाज में दूरी बढ़ती जा रही है। कहीं युद्ध की आहट है, कहीं शब्दों की हिंसा, और कहीं मन टूट रहा है। पर इस अंधकार में भी दयालुता और करुणा की छोटी-छोटी रोशनियाँ जल रही हैं, जो उम्मीद का रास्ता दिखाती हैं। शांति केवल युद्ध के बंद होने का नाम नहीं है। सच्ची शांति हमारे भीतर से शुरू होती है। जब मन शांत, विचार संयमित और दृष्टि समझ से भरी होती है, तभी यह शांति परिवार, समाज और विश्व तक पहुँचती है। आज हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है— स्वयं शांत रहना। केवल शांति की बातें करना पर्याप्त नहीं; उसे अपने व्यवहार में उतारना ज़रूरी है। किसी की बात ध्यान से सुनना, पीड़ा समझना, मदद का हाथ बढ़ाना और छोटे मतभेदों में संयम दिखाना—यही शांति का असली स्वरूप है। विश्व शांति के लिए तीन स्तर पर प्रयास करना होगा: व्यक्तिगत: भीतर की अशांति पहचानना, आत्म-निरीक्षण करना और धैर्य अपनाना। सामाजिक: परिवार और समुदाय में सहयोग, सहानुभूति और अपनत्व बढ़ाना। वैश्विक: संवाद, न्याय और समानता ...

SELF CARE — जीवन की मूलधारा

SELF CARE — जीवन की मूलधारा — आनंद किशोर मेहता SELF CARE केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधा नहीं है; यह जीवन की जड़ है। यह वह आधार है जिससे हमारी ऊर्जा, करुणा और सच्चाई पनपती है। जब हम अपने प्रति दया और सम्मान दिखाते हैं, तो हमारे रिश्तों में मिठास और हमारे सपनों में उजाला स्वतः भर जाता है। आत्मसम्मान और सहानुभूति के बिना जीवन अधूरा है। हमें यह समझना चाहिए कि जो व्यक्ति हमें सोचने और बढ़ने में प्रेरित करता है, वह असाधारण है। गलती स्वीकारना हार नहीं, बल्कि नए आरंभ का द्वार है। प्रयास, संघर्ष और अनुभव—यही जीवन के असली स्तंभ हैं। SELF CARE में धैर्य और सहनशीलता भी शामिल हैं। समय को रोका नहीं जा सकता; वह हमें अनुभवों से ढालता है। परिवर्तन से डरना व्यर्थ है, क्योंकि जो खोता दिखता है, उससे कहीं बेहतर प्राप्त होता है। जीवन में खोकर भी जो आनंद मिलता है, वह शब्दों से परे है। सेवा और ध्यान का मार्ग कभी अकेला महसूस करा सकता है, लेकिन यह हमें भीतर की शांति और सुरक्षा देता है। सेवा ‘मैं’ को पिघलाकर ‘हम’ में बदल देती है और हर कार्य में संतुलन लाती है। यही मार्ग हमें ईश्वर और जीवन के उच्चतम उ...

Awareness & Curiosity: A Path to a Meaningful Life

Awareness & Curiosity (जागरूकता और जिज्ञासा)  Awareness (जागरूकता) का अर्थ है—अपने भीतर और बाहर घट रही हर बात को बिना किसी पूर्वाग्रह या निर्णय के देख पाना। यह हमें वर्तमान क्षण में टिके रहना सिखाती है और अपने विचारों, भावनाओं तथा कर्मों को साफ़ दृष्टि से समझने की क्षमता देती है। Curiosity (जिज्ञासा) वह जीवंत चाह है, जो हर अनुभव से कुछ नया सीखने की प्रेरणा देती है। यही जिज्ञासा हमें प्रश्न पूछने, गहराई में जाने और स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाती है। जब Awareness होती है, तो मन भटकता नहीं—वह वर्तमान में ठहरता है। और जब Curiosity होती है, तो सीखने की यात्रा कभी रुकती नहीं। Awareness हमें यह समझने की शक्ति देती है कि हम क्या सोच रहे हैं, क्यों सोच रहे हैं, और हमारे विचार व कर्म स्वयं तथा दूसरों पर क्या प्रभाव डालते हैं। वहीं Curiosity हमें यह पूछने के लिए प्रेरित करती है— “ऐसा क्यों हुआ?” “इस अनुभव से मैं क्या सीख सकता हूँ?” “मैं खुद को और बेहतर कैसे बना सकता हूँ?” यदि Awareness के साथ Curiosity न हो, तो जीवन ठहराव में चला जाता है। और यद...

The Dual Nature of Wisdom — The Two Lights of Understanding

The Dual Nature of Wisdom — The Two Lights of Understanding Wisdom is not born from a single source. It unfolds from two distinct, yet beautifully complementary streams. One is the wisdom we discover —shaped by learning, observation, experience, and inquiry. The other is the wisdom that reveals itself —arising silently from within, without effort, like a sudden radiance emerging from stillness. The first stream—discovered wisdom— grows through our interaction with the world. It comes from books, teachers, conversations, experiments, challenges, and every moment life teaches us something. This form of wisdom is logical and analytical; it evolves with time and deepens with experience. It explains how life functions, reveals patterns, and strengthens our capacity to understand the world outside. The second stream—revealed wisdom— does not come through study. It arises through awareness . It appears in silence, intuition, contemplation, and moments when the mind becomes still. Sometim...

नम्रता का शिखर — प्रेम का ध्वज | प्रेरणादायक कविता

नम्रता का शिखर — प्रेम का ध्वज | प्रेरणादायक कविता 🌼   नम्रता का शिखर — प्रेम का ध्वज  🌼 मैं इतना झुका, इतना सरल, इतना विनम्र बना कि दुनिया की हैरानी भी क्षणभर को ठहर गई। अगर इससे भी नीचे झुकाने की किसी को चाहत हो— तो बस एक संकेत दे देना; शायद मैं राह से भटक गया हूँ, ताकि अपनी ही रोशनी में लौटकर सही मार्ग फिर पहचान सकूँ। और जब नम्रता की हर कसौटी पूरी हो चली, तो आओ—अब सब मिलकर रा धा/ध: स्व आ मी 🙏 दयाल के पावन संदेश को प्रेम, शांति और मालिक की दया–मेहर की अनंत अनुकंपा के साथ पूरे विश्व में गूँजाएँ। उन्नत कर दें वह ध्वज, जो करुणा का प्रतीक है— और उसे ऐसा गगनचुंबी बना दें कि वह केवल पृथ्वी पर नहीं, सारे ब्रह्मांड में झूम-झूम कर लहराए। ✍️ Anand Kishor Mehta Bhadeji Centre, Gaya (Bihar) नीरज भाई साहब, आपकी कल की गहन और प्रेरक बातचीत से प्रभावित होकर मैंने एक कविता रची और इसे यहां गूगल ब्लॉगर पर साझा किया। यह कविता मानव सोच की विशालता और अंतर्मन की गहराई को उजागर करती है। हार्दिक रा धा/ध स्व आ मी 🙏