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सकारात्मक संगति: जीवन में आशा और प्रेरणा का दीपक

सकारात्मक संगति: जीवन में आशा और प्रेरणा का दीपक मनुष्य का जीवन केवल उसके विचारों से ही नहीं, बल्कि उसके चारों ओर मौजूद लोगों की संगति से भी आकार लेता है। सही संगति हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों को दिशा देती है। यही कारण है कि कहा गया है— “जैसी संगति, वैसी गति।” हमारी संगति का प्रभाव इतना गहरा होता है कि वह हमारे व्यक्तित्व, सोच और जीवन के निर्णयों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। यदि हम नकारात्मक और निराश लोगों के बीच रहते हैं, तो हमारी सोच भी धीरे-धीरे बोझिल और हतोत्साहित हो जाती है। इसके विपरीत, सकारात्मक और प्रेरक लोगों का साथ हमारे जीवन में आशा, ऊर्जा और सच्ची प्रेरणा भर देता है। सकारात्मक संगति क्या है? सकारात्मक संगति का अर्थ है ऐसे लोगों के साथ समय बिताना जो हमें जैसे हैं वैसे स्वीकार करें, हमारी क्षमताओं पर भरोसा रखें और कठिन समय में हमें टूटने न दें। ये लोग आलोचना की बजाय मार्गदर्शन देते हैं और निराशा के बजाय समाधान की दिशा दिखाते हैं। सकारात्मक संगति हमें यह सिखाती है कि गलतियाँ अंत नहीं हैं। हर असफलता सीखने और आगे बढ़ने का अवसर है। जब हम ऐसे लोगों के बीच रहते हैं, तो...

सोच और सम्मान: जीवन का सच्चा मूल्य

सोच और सम्मान: जीवन का सच्चा मूल्य  न कोई बड़ा, न कोई छोटा—बस सोच का अंतर। यही सूत्र है जो बताता है कि जीवन में वास्तव में सम्मान कैसे प्राप्त होता है। अक्सर हम सोचते हैं कि सम्मान पद, उम्र या बाहरी प्रतिष्ठा से आता है। लेकिन सच्चाई यह है कि समाज में हमारे लिए जो आदर मिलता है, वह हमारे सोचने और व्यवहार करने के तरीके पर निर्भर करता है। जैसा हम दूसरों के साथ व्यवहार करते हैं, वैसा ही हमें वापस मिलता है। अगर हमारी सोच सकारात्मक, सरल और निष्कपट है, तो लोग हमारे प्रति सम्मान और आदर दिखाते हैं। और यदि हमारी सोच स्वार्थी या दिखावटी है, तो चाहे हम किसी ऊँचे पद पर क्यों न हों, असली सम्मान नहीं मिल पाता। सोच ही वह मापदंड है जो हमें “बड़ा” या “छोटा” बनाती है। एक साधारण व्यक्ति, जिसकी सोच और कर्म ऊँचे हैं, समाज में किसी बड़े पद वाले से अधिक आदर और सम्मान पा सकता है। इसका अर्थ है कि सम्मान की परिभाषा बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होती है। इसलिए जीवन में हमें चाहिए कि हम अपनी सोच और व्यवहार को सुधारें। अपने कर्मों में सच्चाई, ईमानदारी और सद्भाव रखें। ऐसा करने से न केवल हमारे व्यक्तिगत संबंध मजबू...

How Does the Awakening of Consciousness Transform Human Life?

How Does the Awakening of Consciousness Transform Human Life?  The awakening of consciousness brings a profound and lasting transformation to human life. As long as a person lives only through the mind and its desires, life remains restless and confused. The mind continually chases wants, becoming entangled in expectations, fears, and comparisons. When consciousness begins to awaken, life gradually shifts from outer pursuit to inner understanding. This awakening is the realization of one’s true inner self. It does not arise from external success, status, or praise, but through selfless service, inner discipline, and sincere action. As the ego slowly loosens its hold, clarity replaces confusion, and an inner light begins to guide one’s thoughts and actions. With awakened consciousness, a person stops blaming circumstances or others. They recognize that genuine change must occur within. Whether faced with praise or criticism, gain or loss, their inner balance remains steady. This inn...

जब स्वार्थ टूटेगा, तब परमार्थ गूँजेगा

जब स्वार्थ टूटेगा, तब परमार्थ गूँजेगा आज का मानव जीवन अक्सर स्वार्थ और व्यक्तिगत इच्छाओं के घेरे में फँसा दिखाई देता है। जिसे छोड़ना कठिन लगे, वही सबसे बड़ा बंधन बन जाता है। यही बंधन आज हमारे समाज का सबसे प्रमुख जाल है — स्वार्थ। हम इसे कभी-कभी स्वतंत्रता समझ लेते हैं, जबकि यह केवल हमारी दृष्टि और कर्मों को सीमित करने वाली जंजीरें हैं। स्वार्थ का त्याग किसी वास्तविक मृत्यु का संकेत नहीं देता; यह तो पुराने अहंकार, भ्रम और सीमाओं का अंत है। पर यह सत्य समझने में समय लगता है। हर हृदय में परमार्थ का बीज मौजूद है, लेकिन स्वार्थ की परतें उसे ढक देती हैं। इसलिए हम भीतर से महसूस करने के बावजूद उसे अपनाने में असमर्थ रहते हैं। फिर भी, समय और अनुभव की शक्ति अद्भुत है। जब स्वार्थ अपने ही भार से टूटेगा, तब परमार्थ स्वतः आकर्षण बन जाएगा। यह आकर्षण घोषणाओं से नहीं, बल्कि शांत और निस्वार्थ कर्मों से फैलता है। यही शक्ति है, जो धीरे-धीरे समाज और व्यक्तियों को बदल देती है। जब ‘ मैं ’ से मन भर जाएगा, तब ‘ हम ’ की ओर यात्रा स्वाभाविक रूप से शुरू होगी। यह यात्रा कठिन या बोझिल नहीं होगी, बल्कि जीवन क...

विश्व आज: संकट, शांति और हमारी जिम्मेदारी | A K Mehta

विश्व आज: संकट और हमारी जिम्मेदारी  — आनंद किशोर मेहता आज का विश्व गहरे संकट में है। घरों में बेचैनी, गलियों में तनाव और समाज में दूरी बढ़ती जा रही है। कहीं युद्ध की आहट है, कहीं शब्दों की हिंसा, और कहीं मन टूट रहा है। पर इस अंधकार में भी दयालुता और करुणा की छोटी-छोटी रोशनियाँ जल रही हैं, जो उम्मीद का रास्ता दिखाती हैं। शांति केवल युद्ध के बंद होने का नाम नहीं है। सच्ची शांति हमारे भीतर से शुरू होती है। जब मन शांत, विचार संयमित और दृष्टि समझ से भरी होती है, तभी यह शांति परिवार, समाज और विश्व तक पहुँचती है। आज हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है— स्वयं शांत रहना। केवल शांति की बातें करना पर्याप्त नहीं; उसे अपने व्यवहार में उतारना ज़रूरी है। किसी की बात ध्यान से सुनना, पीड़ा समझना, मदद का हाथ बढ़ाना और छोटे मतभेदों में संयम दिखाना—यही शांति का असली स्वरूप है। विश्व शांति के लिए तीन स्तर पर प्रयास करना होगा: व्यक्तिगत: भीतर की अशांति पहचानना, आत्म-निरीक्षण करना और धैर्य अपनाना। सामाजिक: परिवार और समुदाय में सहयोग, सहानुभूति और अपनत्व बढ़ाना। वैश्विक: संवाद, न्याय और समानता ...

SELF CARE — जीवन की मूलधारा

SELF CARE — जीवन की मूलधारा — आनंद किशोर मेहता SELF CARE केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधा नहीं है; यह जीवन की जड़ है। यह वह आधार है जिससे हमारी ऊर्जा, करुणा और सच्चाई पनपती है। जब हम अपने प्रति दया और सम्मान दिखाते हैं, तो हमारे रिश्तों में मिठास और हमारे सपनों में उजाला स्वतः भर जाता है। आत्मसम्मान और सहानुभूति के बिना जीवन अधूरा है। हमें यह समझना चाहिए कि जो व्यक्ति हमें सोचने और बढ़ने में प्रेरित करता है, वह असाधारण है। गलती स्वीकारना हार नहीं, बल्कि नए आरंभ का द्वार है। प्रयास, संघर्ष और अनुभव—यही जीवन के असली स्तंभ हैं। SELF CARE में धैर्य और सहनशीलता भी शामिल हैं। समय को रोका नहीं जा सकता; वह हमें अनुभवों से ढालता है। परिवर्तन से डरना व्यर्थ है, क्योंकि जो खोता दिखता है, उससे कहीं बेहतर प्राप्त होता है। जीवन में खोकर भी जो आनंद मिलता है, वह शब्दों से परे है। सेवा और ध्यान का मार्ग कभी अकेला महसूस करा सकता है, लेकिन यह हमें भीतर की शांति और सुरक्षा देता है। सेवा ‘मैं’ को पिघलाकर ‘हम’ में बदल देती है और हर कार्य में संतुलन लाती है। यही मार्ग हमें ईश्वर और जीवन के उच्चतम उ...

Awareness & Curiosity: A Path to a Meaningful Life

Awareness & Curiosity (जागरूकता और जिज्ञासा)  Awareness (जागरूकता) का अर्थ है—अपने भीतर और बाहर घट रही हर बात को बिना किसी पूर्वाग्रह या निर्णय के देख पाना। यह हमें वर्तमान क्षण में टिके रहना सिखाती है और अपने विचारों, भावनाओं तथा कर्मों को साफ़ दृष्टि से समझने की क्षमता देती है। Curiosity (जिज्ञासा) वह जीवंत चाह है, जो हर अनुभव से कुछ नया सीखने की प्रेरणा देती है। यही जिज्ञासा हमें प्रश्न पूछने, गहराई में जाने और स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाती है। जब Awareness होती है, तो मन भटकता नहीं—वह वर्तमान में ठहरता है। और जब Curiosity होती है, तो सीखने की यात्रा कभी रुकती नहीं। Awareness हमें यह समझने की शक्ति देती है कि हम क्या सोच रहे हैं, क्यों सोच रहे हैं, और हमारे विचार व कर्म स्वयं तथा दूसरों पर क्या प्रभाव डालते हैं। वहीं Curiosity हमें यह पूछने के लिए प्रेरित करती है— “ऐसा क्यों हुआ?” “इस अनुभव से मैं क्या सीख सकता हूँ?” “मैं खुद को और बेहतर कैसे बना सकता हूँ?” यदि Awareness के साथ Curiosity न हो, तो जीवन ठहराव में चला जाता है। और यद...