प्रतिक्रिया नहीं, परिणाम महत्वपूर्ण हैं।
आज के आधुनिक कार्यक्षेत्र में संवाद के कई साधन हैं—फोन कॉल, ईमेल, संदेश या बैठकें। लेकिन केवल प्रतिक्रिया देना ही सफलता की गारंटी नहीं है। असली मूल्य तब सामने आता है जब किसी भी संवाद के बाद कार्य भी प्रभावी रूप से पूरा हो। परिणाम के बिना, केवल प्रतिक्रियाएँ समय और प्रयास की बर्बादी बन जाती हैं।
प्रभावी संवाद का अर्थ है जवाब देना ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ कार्य को आगे बढ़ाना। जब प्रतिक्रिया कार्य में नहीं बदलती, तो संवाद केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। इसलिए किसी भी प्रणाली में प्रतिक्रिया और परिणाम—दोनों पर समान ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।
संक्षेप में:
प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है, लेकिन परिणाम अनिवार्य हैं। केवल बोलने या जवाब देने से काम पूरा नहीं होता—सच्ची सफलता तब मिलती है, जब कार्य का वास्तविक परिणाम सामने आए।
– Anand Kishor Mehta
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