गांव की गलियाँ और उनके किस्से – राजाबरारी की झलक
आज मैं राजाबरारी गांव गया और वहां के स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया।
थोड़ी देर रुककर उनकी संस्कृति, परंपराएँ और रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से समझा।
गांव की गलियाँ शांत और सादगी भरी थीं, हर मोड़ पर मिट्टी की खुशबू और अपनापन महसूस हुआ।
स्थानीय लोगों की बातें, उनकी हँसी और अनुभव यह याद दिलाते हैं कि असली सीख अक्सर किताबों से नहीं, बल्कि जीवन और लोगों से मिलती है।
राजाबरारी की खूबसूरती सिर्फ परंपराओं में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे अनुभवों और अपनापन में झलकती है।
यह अनुभव आंखों और दिल दोनों को ताजगी देता है।
आनंद किशोर मेहता








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