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Showing posts from March, 2025

अपनी नई कहानी स्वयं लिखो

अपनी नई कहानी स्वयं लिखो ~ आनंद किशोर मेहता प्रिय विद्यार्थियों, जीवन एक सुंदर यात्रा है। हर दिन हमें सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों के करीब जाने का अवसर देता है। यह ज़रूरी नहीं कि रास्ता हमेशा आसान हो, लेकिन यह निश्चित है कि हर कठिनाई हमें पहले से अधिक मज़बूत बनाती है। उठो, जागो और आगे बढ़ो “बेटा, उठो और जागो—सवेरा हो गया है। हिम्मत मत हारो, एक दिन तुम्हारी मेहनत रंग लाएगी।” ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि निराशा के अंधेरे के बाद सफलता का उजाला अवश्य आता है। आज की मेहनत ही कल की सफलता की नींव होती है। संघर्ष से ही शक्ति मिलती है संघर्ष जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। जब हम गिरते हैं, तब हमें संभलना आता है। जब हम हारते हैं, तब हमें सीख मिलती है। और जब हम डटे रहते हैं, तभी हम जीतते हैं। विचार: “संघर्ष हमें परिष्कृत करता है और हमारी वास्तविक क्षमता को उजागर करता है।” आत्मविश्वास – सफलता की कुंजी अपने आप पर विश्वास रखो। यदि तुम स्वयं पर भरोसा करोगे, तो कोई भी बाधा तुम्हें रोक नहीं सकती। आत्मविश्वास से भरा मन हर समस्या का समाधान ढूँढ लेता है। विचार: “आत्मविश्वास का हर क...

60 की उम्र – जीने का सही समय!

60 की उम्र – जीने का सही समय!  ~  आनंद किशोर मेहता "अब अपनी ज़िंदगी को नए रंग दो, क्योंकि असली मज़ा अब शुरू होता है!" 60 की उम्र तक हम ज़िंदगी की भाग-दौड़ में इतना उलझ जाते हैं कि जीना ही भूल जाते हैं। जिम्मेदारियों का बोझ, समाज की अपेक्षाएँ, बच्चों का भविष्य, करियर की ऊँचाइयाँ—इन सबमें उलझते-उलझते कब जवानी बीत जाती है, पता ही नहीं चलता। लेकिन क्या ज़िंदगी का सफर यहीं खत्म हो जाता है? बिल्कुल नहीं! "अब समाज की नहीं, अपने दिल की सुनो—क्योंकि असली जीवन अब शुरू होता है!" 60 की उम्र तो असल में जीवन का स्वर्णिम दौर है। यह वह समय है जब आप अपनी मर्जी से जी सकते हैं, अपने अधूरे सपनों को पूरा कर सकते हैं और ज़िंदगी को अपने अंदाज में फिर से जीने का आनंद उठा सकते हैं। 1. अब दुनिया की चिंता छोड़ो, खुद को जियो! अब तक हमने अपने परिवार, समाज और ज़िम्मेदारियों को निभाने में अपनी इच्छाओं को कहीं पीछे छोड़ दिया था। लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपने मन की सुनें! ✔ क्या आप कभी पहाड़ों पर घूमना चाहते थे? ✔ क्या आपको पेंटिंग, संगीत या नृत्य का शौक था? ✔ क्या कभी बिना किसी फ...

विज्ञान + आध्यात्म = संतुलित और सुरक्षित भविष्य

विज्ञान + आध्यात्म = संतुलित और सुरक्षित भविष्य  ~ आनंद किशोर मेहता परिचय आज की दुनिया विज्ञान की अद्भुत उन्नतियों से भरी हुई है। तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसी के साथ मानसिक तनाव, अस्थिरता और आध्यात्मिक रिक्तता भी बढ़ी है। सवाल यह है— क्या विज्ञान और आध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं? या क्या इनका समन्वय ही मानवता को संतुलित और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जा सकता है? यदि हमें एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और सुरक्षित समाज का निर्माण करना है, तो विज्ञान और आध्यात्म का मिलन अनिवार्य है। विज्ञान और आध्यात्म: विरोध नहीं, पूरक विज्ञान और आध्यात्म को अक्सर अलग दिशाओं में चलता समझा जाता है, जबकि यह सत्य के दो पहलू हैं। विज्ञान बाहरी जगत के रहस्यों को समझता है। आध्यात्म आंतरिक चेतना के रहस्यों को उजागर करता है। जब दोनों साथ चलते हैं, तब मानव जीवन संतुलित, नैतिक और प्रगतिशील बनता है। “तकनीक और संवेदनशीलता साथ चलें, तभी दुनिया सुरक्षित होगी।” विज्ञान की भूमिका विज्ञान ने चिकित्सा, संचार, अंतरिक्ष अन्वेषण और आधुनिक जीवन को नई दिशा दी है। विज्ञान तर्क और प्रमाण पर आधारित है...

तू हारकर भी विजेता है

तू हारकर भी विजेता है  ~ आनंद किशोर मेहता जीवन में हार और जीत केवल बाहरी घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि ये हमारी आंतरिक स्थिति को भी परिभाषित करती हैं। अक्सर लोग हार को अंत समझ लेते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि हर हार अपने भीतर एक नई जीत की संभावना समेटे होती है। जब तक हम प्रयास करना नहीं छोड़ते, तब तक कोई भी हार अंतिम नहीं होती। "हार कोई अंत नहीं, यह तो बस एक नया आरंभ है!" वैज्ञानिक दृष्टिकोण थॉमस एडिसन का उदाहरण लें, जिन्होंने 1000 से अधिक बार असफल होने के बाद बल्ब का आविष्कार किया। जब उनसे पूछा गया कि इतनी बार विफल होने के बावजूद उन्होंने हार क्यों नहीं मानी, तो उन्होंने उत्तर दिया, "मैं असफल नहीं हुआ, मैंने 1000 ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते थे।" यही असली जीत है—असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ना। "असली हार तब होती है जब हम प्रयास करना छोड़ देते हैं।" दार्शनिक दृष्टिकोण सुकरात, जिन्होंने तर्क और विचारशीलता से समाज को नई दिशा दी, उन्हें भी अपनी सत्यनिष्ठा के कारण विष का प्याला पीना पड़ा। उनकी मृत्यु को उनके विरोधियों ने जीत समझा, लेकिन उनके विच...

प्रकृति की सुंदरता: एक अनुपम एहसास

प्रकृति की सुंदरता: एक अनुपम एहसास   ~ आनंद किशोर मेहता प्रकृति स्वयं में एक महान कलाकार है, जिसकी कूची से निकली हर रचना अनूठी और अनुपम होती है। जब हम प्रकृति की सुंदरता को देखते हैं, तो मन एक असीम शांति और आनंद का अनुभव करता है। हरी-भरी वादियाँ, ऊँचे पर्वत, कलकल बहती नदियाँ, सुरम्य झरने, रंग-बिरंगे फूल, चहचहाते पक्षी—ये सब मिलकर एक ऐसा संसार रचते हैं, जिसमें आत्मा को सुकून और हृदय को स्फूर्ति मिलती है। "फूलों की तरह खिलो, नदियों की तरह बहो, और पेड़ों की तरह धरती से जुड़े रहो।" प्राकृतिक सौंदर्य का महत्व प्राकृतिक सुंदरता केवल आँखों को लुभाने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। जब हम प्रकृति के सान्निध्य में होते हैं, तो हमारी चिंताओं का भार हल्का हो जाता है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि हरे-भरे स्थानों में समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और जीवन में संतुलन बना रहता है। "जब मन व्याकुल हो, तो प्रकृति की ओर देखो—हर वृक्ष, हर लहर, हर झोंका शांति का संदेश देता है।" प्रकृति से जुड़ाव: आत्मिक अनुभव जो व्यक्ति प्रकृति ...

होली: रंगों से परे प्रेम, चेतना और आत्मिक जागरण का उत्सव

होली: रंगों से परे प्रेम, चेतना और आत्मिक जागरण का उत्सव ~ आनंद किशोर मेहता होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है। यह प्रेम की ज्योति जलाने, आत्मिक चेतना में डूबने और जीवन के सभी भेदभाव मिटाने का पर्व है। यह बाहरी उत्सव मात्र नहीं, बल्कि हमारे भीतर छिपे आनंद, प्रेम और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रस्फुटन का अवसर है। होली का आध्यात्मिक संदेश जब तक हम केवल बाहरी रंगों में उलझे रहेंगे, सच्चा आनंद अधूरा रहेगा। यह पर्व हमें निमंत्रण देता है कि हम अपने भीतर झाँकें, अहंकार और नकारात्मकताओं को जलाएँ और प्रेम, करुणा तथा दिव्यता के रंगों में स्वयं को सराबोर करें। आध्यात्मिक होली के प्रमुख पहलू भीतर की नकारात्मकता को जलाना – क्रोध, ईर्ष्या, मोह और अहंकार को समाप्त करना। सच्चे आनंद की अनुभूति – प्रेम और आत्मिक शांति के रंग स्थायी हैं। मोह-माया से मुक्ति – सांसारिक भटकाव से मुक्त होकर आत्मा के सत्य स्वरूप का बोध। ईश्वर से एकाकार होना – बाहरी रंगों के बाद शुद्ध चेतना का अनुभव। सर्वत्र प्रेम और करुणा का विस्तार – समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाना। होली: प्रेम, सौहार्द्र और उल्लास का प्रतीक...

शुभ वसंत: प्रकृति, आध्यात्म और उत्सव का दिव्य संगम

दयालबाग़ बसंत 2025: आध्यात्मिक उल्लास और चेतना का महोत्सव:  ✍ ~ आनंद किशोर मेहता "वसंत केवल ऋतु परिवर्तन नहीं, बल्कि सूर्त के नवजागरण का पर्व है।" वसंत ऋतु प्रकृति के जागरण का समय है। जब धरती अपनी सौंदर्यपूर्ण आभा में मुस्कुराती है, जब कोयल की मधुर कूक और पपीहे की पुकार अंतर्मन को पुलकित कर देती है, जब चारों ओर पीले पुष्पों की स्वर्णिम छटा बिखर जाती है—तब वसंत अपने पूरे वैभव के साथ प्रकट होता है। लेकिन यह ऋतु केवल बाहरी उल्लास का ही नहीं, बल्कि हमारे भीतर छुपे संत स्वरूप को प्रकट करने का भी अवसर है। जब अंतःकरण में स्वतः शब्द गुंजायमान होने लगते हैं, जब हृदय में आरती की लौ स्वयं जल उठती है, जब सूर्त में गुरु का प्रकाश प्रकट होता है—तब वसंत की आनंदमयी अनुभूति एक आध्यात्मिक जागरण बन जाती है। दयालबाग़ बसंत 2025: एक दिव्य अनुष्ठान वसंत पंचमी का दिन दयालबाग़, आगरा में विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। यह केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं, बल्कि राधास्वामी मत के अनुयायियों के लिए एक पवित्र दिवस रहा। इस वर्ष 6 मार्च से 10 मार्च 2025 तक दयालबाग़ में भव्य उत्...

दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को राष्ट्रीय विश्वकर्मा पुरस्कार – राजाबरारी के विकास में ऐतिहासिक योगदान

दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को राष्ट्रीय विश्वकर्मा पुरस्कार – राजाबरारी के विकास में ऐतिहासिक योगदान शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए, दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) ने राष्ट्रीय विश्वकर्मा पुरस्कार 2019 में देशभर के 188 संस्थानों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह सम्मान अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा प्रदान किया गया, जो संस्थान की ग्रामीण विकास और कौशल उन्नयन में उत्कृष्ट भूमिका को दर्शाता है। इस उपलब्धि की खबर दैनिक जागरण में प्रकाशित हुई थी और राजाबरारी क्षेत्र के लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सम्मान के पीछे DEI का अथक परिश्रम और समर्पण रहा है। राजाबरारी क्षेत्र में विकास की नई रोशनी हरदा जिले के राजाबरारी क्षेत्र में, जहां शिक्षा और रोजगार के सीमित साधन थे, वहां दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट ने अपने अभिनव प्रयासों से नई क्रांति लाई है। संस्थान ने न केवल शिक्षा को बढ़ावा दिया बल्कि कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से सैकड़ों ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया। संस्थान द्वारा निम्नलि...